एससी ने पलटा झारखंड हाईकोर्ट का फैसला, दो शिशुओं की हत्या के दोषियों की सजा बहाल

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एससी ने पलटा झारखंड हाईकोर्ट का फैसला, दो शिशुओं की हत्या के दोषियों की सजा बहाल

SC overturns Jharkhand High Court’s decision, restores punishment of two infant murder convicts

नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें दो आरोपियों को बरी कर दिया गया था, जिन पर रात में सो रही दो शिशु बेटियों की जलाकर हत्या करने का आरोप था। शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि वाले आदेश को बहाल करते हुए आरोपियों को दो हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश दिया।

दो-न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस प्रसन्न बी. वराले शामिल थे, ने कहा कि गवाहों की प्रतिक्रिया को लेकर कोई तयशुदा फॉर्मूला नहीं हो सकता। अदालत ने माना कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों (PW1 और PW5) के बयान विश्वसनीय हैं और केवल इस आधार पर खारिज नहीं किए जा सकते कि धमाके के बाद दंपति जान बचाने के लिए बच्चों को कमरे में छोड़कर बाहर निकल गए।

मामला क्या था?

अभियोजन के अनुसार, बस एजेंसी चलाने वाले सूचना देने वाले (PW1) को आरोपियों ने कई बार धमकी दी थी कि वह यह काम छोड़ दें। 1-2 अप्रैल 1992 की रात करीब 1:45 बजे उनके घर में विस्फोट हुआ और आग लग गई। वह और उनकी पत्नी पीछे के दरवाजे से निकल गए, लेकिन उनकी दो नन्हीं बेटियां अंदर फंस गईं और जलकर मौत हो गई।

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गवाह ने बताया कि धमाके के तुरंत बाद उसने आरोपियों समेत चार लोगों को मौके से भागते देखा। एफआईआर में IPC की धारा 436 (आगजनी), 307 (हत्या का प्रयास) और 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज हुआ। ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराकर सात साल की कठोर कैद की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने 2023 में पलट दिया था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—

  • हाईकोर्ट ने गलत तरीके से माना कि कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है, जबकि पीड़ित स्वयं विस्फोट, आग और आरोपियों को मौके पर देखने का गवाह था।
  • यह जरूरी नहीं कि इस्तेमाल किया गया विस्फोटक “बम” ही हो, कोई भी विस्फोटक पदार्थ हो सकता है जिसने आग लगाई।
  • माता-पिता के बच्चों को पीछे छोड़ने की प्रतिक्रिया को लेकर सामान्यीकृत अनुमान लगाना सही नहीं।

नतीजा

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसला बहाल कर दिया और दोनों आरोपियों—नीलू गंझू उर्फ नीलकांत राम गंझू और महबूब अंसारी—को दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।

मामले का शीर्षकThe State of Bihar now Jharkhand v. Nilu Ganjhu @ Nilkant Ram Ganjhu & Anr.
न्यूट्रल सिटेशन – 2025 INSC 942

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