‘Rent Agreement Act 2025’ पूरी तरह फर्जी: राज्यों का ही अधिकार, केंद्र ने कोई नया किराया कानून नहीं बनाया

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सोशल मीडिया पर फैल रहा “Rent Agreement Act 2025” पूरी तरह फर्जी है। किराया कानून राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं; केंद्र सरकार ऐसा कानून बना ही नहीं सकती। वायरल दावे Model Tenancy Act 2021 के वैकल्पिक प्रावधानों को गलत तरीके से “नए कानून” बताकर पेश कर रहे हैं।

‘न्यू रेंट एग्रीमेंट एक्ट 2025’ के दावे झूठे हैं। केंद्र ने कोई नया रेंट कानून नोटिफाई नहीं किया है, और टेनेंसी रेगुलेशन राज्य के अधिकार क्षेत्र में हैं।

‘Rent Agreement Act 2025’ पूरी तरह फर्जी: राज्यों का ही अधिकार, केंद्र ने कोई नया किराया कानून नहीं बनाया

हाल के सप्ताहों में सोशल मीडिया, यूट्यूब चैनलों, वित्तीय कंटेंट क्रिएटर्स और कुछ मुख्यधारा मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि केंद्र सरकार ने एक नया और व्यापक कानून—“New Rent Agreement Act 2025”, “Home Rent Rules 25” या “नया किराया कानून 2025”—लागू कर दिया है। वायरल पोस्टों में कहा जा रहा है कि अब पूरे देश में किरायानामा डिजिटल रूप में अनिवार्य होगा, सिक्योरिटी डिपॉजिट केवल दो महीने तक सीमित होगा, और किरायेदारों व मकान मालिकों को तुरंत इन “नए नियमों” का पालन करना होगा।

लेकिन यह दावे पूरी तरह झूठे, भ्रामक और संवैधानिक रूप से असंभव हैं। ऐसा कोई Rent Agreement Act 2025 अस्तित्व में नहीं है, और न ही केंद्र सरकार ने इस प्रकार का कोई राष्ट्रव्यापी किराया कानून अधिसूचित किया है।

संवैधानिक स्थिति: किराया और tenancy राज्यों का विषय

भारत के संविधान के अनुसार, किराया, आवास और tenancy पूर्णतः राज्य सूची (State List) का विषय है।
अनुच्छेद 246 के तहत,

  • List II (State List), Entry 18—भूमि, भूमि अधिकार, जमीन और भवनों पर अधिकार, तथा भूमि-मकान मालिक और किरायेदारों के संबंध—पूरी तरह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
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इसका सीधा अर्थ है कि
केंद्र सरकार पूरे देश पर लागू होने वाला कोई बाध्यकारी Rent Act नहीं बना सकती।
➡ कानून बनाने का अधिकार केवल राज्य सरकारों को है।

इसीलिए देश में अलग-अलग राज्यों के अपने-अपने Rent Control Acts लागू हैं, और वे ही तब तक लागू रहेंगे जब तक राज्य उन्हें संशोधित या निरस्त नहीं करते।

वायरल दावों की सच्चाई: वे Model Tenancy Act, 2021 से उठाए गए अंश हैं

जो प्रावधान—

  • लिखित किरायानामा अनिवार्य,
  • दो महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट सीमा,
  • किराये संबंधी मानकीकृत नियम—

फ़र्जी “Rent Act 2025” के हिस्से के रूप में दिखाए जा रहे हैं, वास्तव में वे Model Tenancy Act (MTA), 2021 से लिए गए हैं

लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि:

MTA कोई कानून नहीं है — यह सिर्फ़ एक वैकल्पिक मॉडल नीति थी

  • इसे 2 जून 2021 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूर किया।
  • 7 जून 2021 को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने इसे सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सिर्फ़ अडॉप्ट करने हेतु भेजा।
  • यह सिर्फ़ एक advisory framework है—केंद्रीय सरकार इसे लागू नहीं कर सकती।

इस स्थिति को 25 जुलाई 2022 को राज्यसभा में दिए लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री श्री कौशल किशोर ने भी स्पष्ट किया था।

कितने राज्यों ने Model Tenancy Act को अपनाया?

नवीनतम उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल चार राज्यों ने इसे लागू किया है—

  • असम
  • आंध्र प्रदेश
  • तमिलनाडु
  • उत्तर प्रदेश

बाकी अधिकांश राज्यों ने इसे आज तक अपनाया ही नहीं है। इसलिए MTA के प्रावधान पूरे भारत पर लागू नहीं होते।

“Rent Agreement Act 2025” वाली फेक ख़बरें कैसे फैलीं?

पिछले एक महीने में—

  • कई यूट्यूब ‘कानूनी’ चैनलों,
  • वित्तीय सलाहकार कंटेंट क्रिएटर्स,
  • प्रतियोगी परीक्षा तैयारी प्लेटफॉर्म्स,
  • और कुछ मीडिया हाउसेज़
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ने बिना जांच किए यह गलत दावा प्रकाशित कर दिया कि “नया केंद्रीय किराया कानून आ गया है।”
यह गंभीर समस्या इसलिए भी है, क्योंकि:

ऐसी गलत सूचनाएँ करोड़ों लोगों के अधिकारों पर असर डालती हैं

किराया कानून सीधे—

  • किरायेदारों,
  • मकान मालिकों,
  • रियल एस्टेट सेक्टर,
  • निम्न और मध्यम वर्ग

को प्रभावित करते हैं। जब गलत कानूनी जानकारी फैलाई जाती है, तो लोग गलत कदम उठाते हैं, गलतफहमियों के शिकार होते हैं और अनावश्यक विवाद बढ़ते हैं।

निष्कर्ष: “Rent Agreement Act 2025” — 100% फर्जी

➡ यह दावा झूठा है।
➡ केंद्र सरकार ने कोई नया किराया कानून नहीं बनाया।
➡ संविधान के अनुसार ऐसा कानून बनाना केंद्र के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
➡ वायरल नियम सिर्फ़ Model Tenancy Act, 2021 से लिए गए अंश हैं, जो केवल वैकल्पिक हैं, अनिवार्य नहीं।

गलत कानूनी जानकारी का प्रसार अत्यंत हानिकारक है और यह घटना साफ़ दिखाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र में संवैधानिक साक्षरता और जिम्मेदार पत्रकारिता कितनी जरूरी है।


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