गैरकानूनी प्रवास और उग्रवाद पर सवाल उठाना दुश्मनी फैलाना नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

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गैरकानूनी प्रवास और उग्रवाद पर सवाल उठाना दुश्मनी फैलाना नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

Questioning illegal migration, militancy is not inciting enmity: Guwahati High Court

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पत्रकार कोंकन बोरठाकुर के खिलाफ 2016 की FIR को खारिज करते हुए कहा कि अवैध प्रवास, धार्मिक कट्टरवाद और उग्रवाद पर सवाल उठाना दुश्मनी फैलाने या हिंसा भड़काने के बराबर नहीं है। यह फैसला पत्रकारिता की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को मजबूत करता है।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पत्रकार द्वारा अवैध प्रवास, धार्मिक कट्टरवाद, उग्रवादी गतिविधियों और स्वदेशी लोगों पर जनसांख्यिकीय खतरे जैसे मुद्दों को उठाना मात्र इस आधार पर समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाने या हिंसा भड़काने की श्रेणी में नहीं आता।

जस्टिस प्रांजल दास की बेंच ने 2016 में दैनिक जनमभूमि के पत्रकार कोंकन बोरठाकुर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया। यह एफआईआर 11 नवंबर 2016 को फरीद इस्लाम हज़ारिका, अध्यक्ष, आल असम मुस्लिम स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU), शिवसागर द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप था कि पत्रकार की रिपोर्ट ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और विभाजन पैदा करने की कोशिश की।

रिपोर्ट में अवैध प्रवासियों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय संकट, धार्मिक कट्टरवाद से जुड़ी चुनौतियाँ और उग्रवादी गतिविधियों पर चिंता जताई गई थी।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ

  • अदालत ने कहा कि किसी भी पत्रकार का मूल कर्तव्य है कि वह समाज से जुड़े अहम मुद्दों को उजागर करे।
  • रिपोर्ट की सामग्री में कहीं भी किसी जातीय या धार्मिक समुदाय के खिलाफ द्वेष फैलाने का प्रयास नहीं दिखा।
  • धारा 153A IPC (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) लागू करने के लिए आवश्यक mens rea (दुष्प्रेरणा) इस मामले में मौजूद नहीं थी।
  • “केवल अवैध प्रवास, धार्मिक कट्टरवाद और उग्रवाद पर चिंता जताना समाज में दुश्मनी फैलाने या हिंसा भड़काने के बराबर नहीं है।”
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परिणाम

हाईकोर्ट ने पूरे मामले को निरस्त करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यवाही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के लोकतांत्रिक कर्तव्यों पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

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