इंस्टाग्राम पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट के आरोपी युवक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ जमानत दी। कोर्ट ने कहा—देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं, वरना जमानत रद्द होगी। मामला बीएनएस की धारा 152 से जुड़ा।
इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर “पाकिस्तान जिंदाबाद” लिखकर पोस्ट करने के आरोपी युवक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी सोशल मीडिया पर देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक सामग्री साझा नहीं करेगा। किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत स्वतः निरस्त की जा सकती है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आरोपी फैजान की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
गिरफ्तारी और आरोप
आरोपी के खिलाफ एटा जिले के जलेसर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य करने का आरोप लगाया गया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 से संबंधित है, जिसे पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) के स्थान पर लागू किया गया है।
पुलिस के अनुसार, तीन मई 2025 को पहलगाम हमले के बाद आरोपी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कथित रूप से “पाकिस्तान जिंदाबाद” पोस्ट किया था। इसी आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह तीन मई 2025 से न्यायिक हिरासत में था।
बचाव पक्ष की दलील
आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि भले ही पोस्ट आपत्तिजनक मानी जा सकती है, लेकिन भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 इस मामले में लागू नहीं होती। उनका कहना था कि आरोपी ने भारत के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष अपमानजनक या अवमाननापूर्ण टिप्पणी नहीं की। केवल किसी शत्रु देश के समर्थन में नारा लिखना अपने आप में धारा 152 के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी लंबी अवधि से जेल में है और जमानत मिलने पर वह स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा।
राज्य का विरोध
राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों की गंभीरता का हवाला दिया। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को प्रभावित कर सकती है।
कोर्ट का फैसला
दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी भविष्य में सोशल मीडिया पर भारत की प्रतिष्ठा या किसी भी समुदाय के विरुद्ध कोई आपत्तिजनक पोस्ट नहीं करेगा। यदि वह शर्तों का उल्लंघन करता है तो अभियोजन पक्ष जमानत निरस्तीकरण की अर्जी दाखिल कर सकता है।
हालांकि, अदालत ने इस चरण पर मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की।
क्या है बीएनएस की धारा 152?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य—जैसे अलगाववाद, सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियां—दंडनीय अपराध हैं। यह प्रावधान पूर्व की आईपीसी धारा 124ए (राजद्रोह) का संशोधित रूप माना जाता है।
इस धारा के तहत बोलकर, लिखकर, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या अन्य साधनों से ऐसे कृत्य करने पर आजीवन कारावास या सात वर्ष तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
व्यापक संदर्भ
सोशल मीडिया पर राष्ट्र-विरोधी या विवादास्पद नारों से जुड़े मामलों में अदालतों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन साधना पड़ता है। इस आदेश में हाईकोर्ट ने एक ओर जमानत का सिद्धांत लागू किया, वहीं दूसरी ओर आरोपी पर कड़ी शर्तें लगाकर यह संकेत दिया कि सोशल मीडिया की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है।
मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में होगी, जहां आरोपों की वैधानिकता और धारा 152 की प्रयोज्यता पर अंतिम निर्णय होगा।
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