दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-UG 2024 में कथित अनियमितताओं के आधार पर MBBS एडमिशन रद्द करने को असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने कहा कि बिना CBI चार्जशीट और prima facie दोष के छात्र का शिक्षा का अधिकार छीना नहीं जा सकता।
बिना दोष सिद्ध हुए करियर खत्म नहीं किया जा सकता
NEET-UG 2024 में कथित परीक्षा अनियमितताओं के आधार पर MBBS एडमिशन रद्द करने के मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम और छात्र-हितैषी फैसला सुनाया है।
जस्टिस जसमीत सिंह की सिंगल-जज बेंच ने साफ कहा कि राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा पास करने से अर्जित “valuable right” को मनमाने और असंगत आधारों पर छीना नहीं जा सकता, खासकर तब जब छात्र CBI जांच में आरोपी ही नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2022 में कक्षा 12वीं पास की और 05 मई 2024 को आयोजित NEET-UG 2024 परीक्षा में भाग लिया।
04 जून 2024 को घोषित परिणाम में उसे:
- All India Rank: 28,106
- General Category Rank: 11,234
प्राप्त हुई।
बाद में 26 जुलाई 2024 को संशोधित स्कोरकार्ड जारी किया गया, जिसमें उसके 651/720 अंक दर्शाए गए।
काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद याचिकाकर्ता को भिमा भोई मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बलांगीर (ओडिशा) में MBBS कोर्स में प्रवेश मिला।
CBI समन, लेकिन आरोपी नहीं
15 अगस्त 2024 को CBI ने NEET-UG 2024 में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में याचिकाकर्ता को समन भेजा।
हालांकि, CBI की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि:
- याचिकाकर्ता आरोपी नहीं,
- बल्कि केवल एक गवाह है।
इसके बावजूद, NTA ने 23 अक्टूबर 2024 को शो-कॉज नोटिस जारी किया और बाद में याचिकाकर्ता का परिणाम/स्कोरकार्ड वापस ले लिया।
इसके परिणामस्वरूप मेडिकल कॉलेज ने उसका MBBS एडमिशन रद्द कर दिया।
CBI रिपोर्ट के नाम पर सामूहिक कार्रवाई
MBBS एडमिशन रद्द करने का आधार 23 जनवरी 2025 को नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा भेजी गई वह सूची थी, जिसमें CBI रिपोर्ट के हवाले से कुछ छात्रों के परिणाम रोके गए थे।
हाईकोर्ट ने इस तरीके पर गंभीर सवाल उठाए।
मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या किसी छात्र का MBBS एडमिशन केवल “आरोपों” के आधार पर रद्द किया जा सकता है, जब
- वह CBI चार्जशीट में आरोपी नहीं है, और
- उसके खिलाफ कोई prima facie निष्कर्ष मौजूद नहीं है?
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा:
“यदि मेरिट के आधार पर प्राप्त प्रवेश को रद्द करना है, तो उसके लिए valid, genuine और compelling reasons होने चाहिए।”
CBI के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कि याचिकाकर्ता आरोपी नहीं है, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ किसी भी तरह की prima facie संलिप्तता सिद्ध नहीं होती।
NEET पास करना ‘valuable right’
कोर्ट ने कहा कि NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा पास करने से छात्र को एक कीमती अधिकार (valuable right) प्राप्त होता है, जिसकी रक्षा की जानी चाहिए।
“बिना किसी न्यायोचित आधार के एडमिशन रद्द करना छात्र की शैक्षणिक प्रगति को गंभीर रूप से बाधित करता है।”
उच्च शिक्षा: राज्य की सकारात्मक जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने उच्च और व्यावसायिक शिक्षा के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण संवैधानिक टिप्पणी की:
“भले ही उच्च शिक्षा को Part III में स्पष्ट मौलिक अधिकार के रूप में न लिखा गया हो, लेकिन यह राज्य की एक affirmative obligation है और इसे हल्के में curtailed नहीं किया जा सकता।”
नतीजा
कोर्ट ने:
- याचिका स्वीकार की
- Writ of Mandamus जारी की
- NTA, NMC और मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिया कि
- याचिकाकर्ता को MBBS कक्षाओं में पढ़ाई जारी रखने दी जाए,
- और उसका अकादमिक भविष्य अनिश्चित आरोपों के आधार पर बर्बाद न किया जाए।
केस डिटेल्स
Harshit Agrawal v. National Testing Agency
W.P.(C) 12514/2025
दिल्ली हाईकोर्ट
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Delhi High Court, NEET UG 2024, MBBS Admission Cancellation, Right to Education, NTA, CBI Investigation, Article 226, Medical Admission
