दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार Jaypee Infratech Ltd के पूर्व CMD मनोज गौर की अंतरिम जमानत 10 दिन के लिए बढ़ा दी। कोर्ट ने जमानत बढ़ाते हुए सख्त शर्तें लगाईं और ED की याचिका मार्च में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार Jaypee Infratech Ltd के पूर्व CMD मनोज गौर को दी गई अंतरिम जमानत को 10 दिनों के लिए बढ़ा दिया। यह राहत उनकी 92 वर्षीय मां की गंभीर और अंतिम अवस्था (terminal condition) को देखते हुए दी गई है।
जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने अंतरिम जमानत बढ़ाते हुए गौर पर कड़ी शर्तें लगाईं और स्पष्ट किया कि इस अवधि में वह किसी भी प्रकार के व्यावसायिक, बैंकिंग या संपत्ति से जुड़े लेनदेन में शामिल नहीं होंगे।
कड़ी शर्तों के साथ अंतरिम राहत
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि—
- मनोज गौर किसी भी प्रकार का बिजनेस ट्रांजैक्शन नहीं करेंगे
- कोई बैंकिंग लेनदेन नहीं किया जाएगा
- किसी संपत्ति में थर्ड पार्टी अधिकार का सृजन या ट्रांसफर नहीं होगा
- अपना पासपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपना होगा
कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि गौर की मां की हालत डेथ बेड जैसी है और वह गंभीर रूप से बीमार हैं।
ED की चुनौती और कोर्ट की कार्यवाही
मनोज गौर को पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने 24 जनवरी को उनकी मां के स्वास्थ्य आधार पर 14 दिन की अंतरिम जमानत दी थी। इस आदेश को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इसी बीच, अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने से पहले गौर ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए जमानत बढ़ाने की मांग की।
ED की ओर से एडवोकेट राहुल त्यागी ने जमानत विस्तार का विरोध करते हुए कहा कि जब अंतरिम जमानत का आदेश पहले से ही हाईकोर्ट में चुनौती के तहत है, तब विस्तार के लिए नई याचिका “अभूतपूर्व” है।
गौर की ओर से दलीलें
मनोज गौर की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और एडवोकेट डॉ. फर्रुख खान पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि—
- अंतरिम जमानत अगले दिन समाप्त हो रही है, इसलिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना जरूरी था
- ED ने गौर की मां की मेडिकल स्थिति का सत्यापन नहीं किया
- गौर की मां 92 वर्ष की हैं, बिस्तर पर हैं और कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं
इन दलीलों का ED ने विरोध किया।
13,000 करोड़ रुपये का कथित घोटाला
ED का आरोप है कि यह मामला ₹13,000 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से जुड़ा है, जिसमें करीब 25,000 होमबायर्स पीड़ित हैं। एजेंसी के अनुसार—
- जयपी समूह ने होमबायर्स से जुटाई गई राशि का उपयोग आवास निर्माण के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया
- लगभग ₹14,599 करोड़ (NCLT में स्वीकार दावों के अनुसार) में से बड़ी राशि ग्रुप की संबद्ध कंपनियों और ट्रस्टों में डायवर्ट की गई
- इनमें जयपी सेवा संस्थान (JSS), जयपी हेल्थकेयर लिमिटेड और जयपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड शामिल हैं
ED का दावा है कि मनोज गौर, जयपी सेवा संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं और फंड डायवर्जन में उनकी केंद्रीय भूमिका रही है।
गिरफ्तारी और जांच का विवरण
ED ने मनोज गौर को 13 नवंबर 2025 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई 2018 में दर्ज ECIR के आधार पर की गई थी, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश की EOW द्वारा दर्ज कई FIRs से जुड़ी है।
23 मई 2025 को ED ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए।
आगे की सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की चुनौती वाली याचिका को मार्च में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। तब तक मनोज गौर अंतरिम जमानत पर रहेंगे, लेकिन सख्त शर्तों के अधीन।
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