‘Model Chai Wali’ Simran Gupta gets relief from Allahabad High Court Lucknow Bench, police harassment to be investigated
📍 इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ का का बड़ा आदेश: मॉडल चाय वाली केस में पुलिस कमिश्नर को जांच सौंपी
लखनऊ | उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘मॉडल चाय वाली’ के नाम से मशहूर सिमरन गुप्ता को इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ का से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनके साथ पुलिसकर्मियों द्वारा की गई मारपीट और उत्पीड़न के आरोपों को गंभीर मानते हुए लखनऊ पुलिस कमिश्नर को छह सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें 8 जून की रात हुई पुलिस बर्बरता का उल्लेख था।
📌 क्या है मामला?सिमरन गुप्ता, जो ‘मॉडल चाय वाली’ के नाम से जानी जाती हैं, इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर चाय की दुकान चलाती हैं। याचिका के अनुसार, 8 जून की रात वह अपनी दुकान में पेंटिंग का काम करवा रही थीं, तभी राम राम बैंक चौकी के तत्कालीन इंचार्ज आलोक कुमार चौधरी, सिपाही अभिषेक यादव, दुर्गेश कुमार वर्मा और महिला सिपाही किरन अग्निहोत्री पहुंचे।
सिमरन का आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने बिना कारण मारपीट की, कपड़े खींचे, और जब उन्होंने वीडियो रिकॉर्ड करने की कोशिश की, तो फोन छीन लिया। हालांकि, पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और एक राहगीर द्वारा बनाए गए वीडियो के ज़रिए यह सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
⚖️ कोर्ट का रुख
- कोर्ट ने माना कि शिकायत गंभीर है और पुलिसकर्मियों पर प्रथम दृष्टया कार्रवाई बनती है।
- पुलिस कमिश्नर को सीधे जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- जांच रिपोर्ट शपथपत्र के रूप में छह सप्ताह में दाखिल करनी होगी।
- अगली सुनवाई की तारीख 6 सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
🧑⚖️ वकील की दलील
सिमरन की ओर से पेश हुए वकील चन्दन श्रीवास्तव ने कहा कि घटना के बाद सिमरन ने पुलिस कमिश्नर व DCP को शिकायती पत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अदालत से पुलिस अधिनियम की धारा 7 व 29 के तहत कार्रवाई की मांग की।
👩🍳 कौन हैं ‘मॉडल चाय वाली’ सिमरन गुप्ता?
- असली नाम: आंचल गुप्ता
- मूल निवासी: गोरखपुर
- पूर्व मॉडल: 2018 में मिस गोरखपुर का खिताब
- कोविड-19 महामारी में मॉडलिंग छोड़नी पड़ी
- प्रेरणा: गोरखपुर की ‘ग्रेजुएट चाय वाली’ से मिली प्रेरणा
- पहली चाय की स्टॉल: गोरखपुर यूनिवर्सिटी हॉस्टल के सामने
- वर्तमान स्टॉल: लखनऊ इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर
- लोकप्रियता: इंस्टाग्राम पर 29,000+ फॉलोअर्स
- कमाई: एक महीने में ₹1 लाख तक की बिक्री
- उपलब्धि: चाय स्टॉल से दुकान खरीदी, स्टॉल और शॉप दोनों चला रही हैं
📷 सोशल मीडिया की भूमिका
सिमरन के स्टॉल पर पुलिसिया कार्रवाई का वीडियो वायरल होने के बाद ही मामला चर्चा में आया और अदालत तक पहुंचा। यह केस सोशल मीडिया की ताकत और पीड़ित की आवाज उठाने की क्षमता का उदाहरण बनकर उभरा है।
🔍 निष्कर्ष
इलाहाबाद हाई कोर्ट लखनऊ खंडपीठ का यह फैसला आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और पुलिस के जवाबदेह व्यवहार की मांग की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर जांच निष्पक्ष होती है, तो यह केस पुलिस सुधारों और महिला उद्यमियों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
