Pattali Makkal Katchi (पीएमके) : तमिलनाडु में पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अंदरूनी नेतृत्व विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सिविल कोर्ट जाने की सलाह दी। अनबुमणि रामदास की अध्यक्षता, ‘मैंगो’ चुनाव चिह्न और ए–बी फॉर्म पर हस्ताक्षर को लेकर तीखी बहस।
तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले Pattali Makkal Katchi (पीएमके) के अंदरूनी सत्ता संघर्ष ने कानूनी मोर्चा भी गरमा दिया है। गुरुवार को Madras High Court में हुई सुनवाई के दौरान दोनों गुटों के बीच तीखी दलीलें पेश की गईं। अदालत ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से परहेज करते हुए याचिकाकर्ताओं को सिविल कोर्ट का रुख करने की सलाह दी।
‘फर्जी दस्तावेज’ और अध्यक्ष पद पर विवाद
एक गुट की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि पार्टी अध्यक्ष के रूप में Anbumani Ramadoss को प्रोजेक्ट करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज दाखिल किए गए हैं। उनका दावा था कि अनबुमणि न तो पार्टी के विधिवत सदस्य हैं और न ही अध्यक्ष पद संभालने के अधिकृत अधिकारी।
दलील में यह भी कहा गया कि पार्टी का चुनाव चिह्न ‘मैंगो’ (आम) जल्द ही फ्रीज हो सकता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
चुनाव रोकने की मांग
इसी बीच, पीएमके संस्थापक S Ramadoss की ओर से दायर एक याचिका में आंतरिक विवाद सुलझने तक आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि यह मामला पार्टी के आंतरिक प्रबंधन से जुड़ा है और ऐसे विवादों का समाधान सिविल न्यायालय में होना चाहिए। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि निर्वाचन आयोग आम तौर पर पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त दलों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
हस्ताक्षरों पर सवाल, आपराधिक शिकायत
दूसरे गुट की ओर से पेश अधिवक्ता बालू ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉ. रामदास की उम्र का दुरुपयोग कर उनके नाम से मुकदमे दायर किए जा रहे हैं। उन्होंने अदालत में सवाल उठाया कि केस दस्तावेजों में मौजूद हस्ताक्षर वास्तव में रामदास के हैं या नहीं।
बालू ने दावा किया कि विभिन्न हलफनामों और दस्तावेजों में हस्ताक्षरों में स्पष्ट असंगतियां हैं। इस संबंध में एक अलग आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई गई है। उनका आरोप था कि अदालत को गुमराह किया गया है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि यदि मामला निराधार पाया गया तो याचिकाकर्ता पक्ष पर लागत (कॉस्ट) भी लगाई जा सकती है।
अधिवक्ता बालू के मुताबिक, दिन के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि अनबुमणि रामदास को विधानसभा चुनाव में पीएमके प्रत्याशियों के लिए अनिवार्य ‘ए’ और ‘बी’ फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से रोकने का कोई निर्देश नहीं है।
चुनावी मौसम में बढ़ा तनाव
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पीएमके का यह आंतरिक विवाद और गहरा गया है। दोनों गुट न केवल पार्टी नेतृत्व बल्कि उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के अधिकार को लेकर भी आमने-सामने हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिविल कोर्ट में मामला लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक एकता पर पड़ सकता है।
फिलहाल, मद्रास हाईकोर्ट के रुख से इतना स्पष्ट है कि न्यायपालिका पार्टी के आंतरिक नेतृत्व विवाद में सीधे हस्तक्षेप करने से बच रही है और पक्षकारों को विधिक रूप से उचित मंच—सिविल कोर्ट—पर समाधान तलाशने की सलाह दे रही है।
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