क्या किसी कंपनी के अमलगमेशन पर ट्रेडिंग स्टॉक के रूप में रखे गए शेयरों के बदले नए शेयर मिलने से तत्काल कर देयता बनती है? सुप्रीम कोर्ट ने धारा 28 आयकर अधिनियम के तहत करयोग्यता, “real income” सिद्धांत और कर निर्धारण के समय पर महत्वपूर्ण स्पष्टता दी।
अमलगमेशन में स्टॉक-इन-ट्रेड शेयरों का प्रतिस्थापन करयोग्य है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
मूल प्रश्न
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्रीय प्रश्न यह था कि—
जब किसी अमलगमेशन (merger) के परिणामस्वरूप, ट्रेडर द्वारा stock-in-trade के रूप में रखे गए शेयरों के बदले अमलगमेटेड कंपनी के नए शेयर मिलते हैं, तो क्या यह प्रतिस्थापन स्वयं में धारा 28, आयकर अधिनियम, 1961 के तहत करयोग्य घटना है, या कर देयता केवल तब उत्पन्न होगी जब उन नए शेयरों को वास्तव में बेचा जाए?
पीठ
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और आर. महादेवन, JJ.
पृष्ठभूमि
- अपीलकर्ता Jindal Ferro Alloys Ltd. (JFAL) के शेयरधारक थे।
- 1996 में उच्च न्यायालयों के आदेशों के अनुसार JFAL का Jindal Strips Ltd. (JSL) में अमलगमेशन हुआ।
- शेयर एक्सचेंज रेशियो के अनुसार, JFAL के 100 शेयरों के बदले JSL के 45 शेयर मिले।
- अपीलकर्ताओं ने दावा किया कि JFAL के शेयर capital asset थे, इसलिए Section 47(vii) के तहत छूट उपलब्ध है।
- आकलन अधिकारी एवं CIT(A) ने इसे adventure in the nature of trade मानते हुए Section 28 के तहत करयोग्य ठहराया।
- ITAT ने अपीलकर्ताओं के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि बिक्री/ट्रांसफर के बिना लाभ नहीं माना जा सकता।
- हाई कोर्ट ने ITAT का आदेश रद्द कर पुनर्विचार हेतु मामला भेज दिया।
विवादित निष्कर्ष
- Capital Asset होने पर अमलगमेशन ट्रांसफर है, पर Section 47(vii) से छूट—विवाद नहीं
- Stock-in-Trade होने पर, नए शेयर मिलने से लाभ Section 28 के तहत करयोग्य—यही विवाद का केंद्र
सुप्रीम कोर्ट का विश्लेषण
A. क्या शेयरों का प्रतिस्थापन ‘आय’ है?
न्यायालय ने कहा कि अमलगमेशन एक statutory substitution है—
एक कंपनी में शेयरधारिता समाप्त होकर दूसरी कंपनी में नई शेयरधारिता उत्पन्न होती है।
व्यावसायिक आय केवल नकद में ही नहीं, बल्कि kind (वस्तु/एसेट) में भी प्राप्त हो सकती है।
यदि ट्रेडिंग स्टॉक के रूप में रखे गए शेयरों के बदले नए शेयर मिलते हैं, तो यह consideration in kind हो सकता है।
B. Commercial Realizability का परीक्षण
केवल शेयर मिल जाना पर्याप्त नहीं है।
Section 28 तभी लागू होगा जब—
- नया एसेट वास्तविक और वर्तमान में भुनाए जाने योग्य (commercially realizable) हो
- शेयर freely marketable हों और तुरंत पैसे में बदले जा सकें
यदि नए शेयरों पर प्रतिबंध है या वे निवेश के रूप में रखे गए हैं, तो करयोग्यता स्वतः नहीं बनती।
C. निश्चित मूल्यांकन और कर निर्धारण का समय
- करयोग्य लाभ वही है जो definite valuation के योग्य हो
- Doctrine of Real Income लागू होगी—
काल्पनिक या कागज़ी लाभ पर कर नहीं - कर देयता:
- ❌ Appointed Date / Court Sanction पर नहीं
- ✅ नए शेयरों के वास्तविक allotment पर, जब लाभ ठोस और मापनीय हो
D. Capital Asset बनाम Stock-in-Trade
न्यायालय ने स्पष्ट अंतर रेखांकित किया—
- Investment (Capital Asset): संरक्षण/मूल्यवृद्धि हेतु
- Stock-in-Trade: व्यवसाय में घूमती पूंजी, जिसका उद्देश्य लाभ कमाना
ट्रेडिंग स्टॉक का प्रतिस्थापन केवल निरंतरता नहीं, बल्कि commercial realisation है।
यदि ऐसे मामलों को करमुक्त रखा जाए, तो कर-चोरी की संभावनाएँ पैदा होंगी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने निर्णायक रूप से कहा कि—
- अमलगमेशन में stock-in-trade शेयरों के बदले नए शेयर मिलना Section 28 के तहत business income हो सकता है
- लेकिन कर देयता तभी उत्पन्न होगी जब:
- नए शेयर freely marketable हों
- उनका निश्चित और वास्तविक मूल्य निर्धारित किया जा सके
- और actual allotment हो चुका हो
वर्तमान मामले में, यह तथ्यात्मक प्रश्न कि JSL के शेयर वास्तव में freely realizable थे या निवेश के रूप में रखे गए, ITAT द्वारा तय किया जाएगा—इसलिए मामला पुनः ट्रिब्यूनल को भेजा गया।
मामला: Jindal Equipment Leasing Consultancy Services Ltd. v. CIT
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