Transgender Persons Act 2019
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका स्वीकार कर शैक्षणिक दस्तावेज़ों में नाम परिवर्तन से इनकार करने वाला आदेश रद्द किया। कोर्ट ने आठ सप्ताह में नई मार्कशीट/प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।
Transgender व्यक्ति की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: शैक्षणिक दस्तावेज़ों में नाम परिवर्तन का निर्देश
इलाहाबाद | जेंडर अधिकार न्यायपालिका रिपोर्ट | 2025 — इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए ट्रांसजेंडर व्यक्ति की याचिका स्वीकार कर ली तथा शैक्षणिक दस्तावेज़ों में उनका नाम परिवर्तन करने से इनकार करने वाले आदेश को कानून की दृष्टि से अस्थिर ठहराया। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर संशोधित मार्कशीट/प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।
पृष्ठभूमि: जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया
याचिकाकर्ता, एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति, को Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 की धारा 7 तथा Rules, 2020 के नियम 6 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणपत्र जारी हुआ था।
इसके बाद उन्होंने नियम 5(3) व Annexure 1 के तहत अपने शैक्षणिक दस्तावेज़ों में नाम बदलने हेतु आवेदन किया।
लेकिन माध्यमिक शिक्षा परिषद, बरेली के क्षेत्रीय सचिव ने आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि:
- “बेलिटेड स्टेज” पर शैक्षणिक दस्तावेज़ों में नाम सुधार की कोई प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है,
- और अधिनियम एवं नियम इस मामले में लागू नहीं होते।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुँचे।
हाईकोर्ट का विश्लेषण: Regional Secretary ने गंभीर कानूनी भूल की
1. ट्रांसजेंडर अधिनियम ‘विशेष कानून’—अधिकारी का तर्क अस्वीकार
कोर्ट ने स्पष्ट कहा:
- ट्रांसजेंडर अधिनियम एक विशेष कानून है,
- धारा 20 यह सुनिश्चित करती है कि यह कानून किसी अन्य कानून को कमज़ोर नहीं करता, बल्कि उसके अतिरिक्त है।
इसलिए, अधिनियम की अवहेलना कर Regional Secretary ने कानूनी त्रुटि की।
2. नियम 5(3) + Annexure 1 से स्पष्ट अधिकार
कोर्ट के अनुसार, दस्तावेज़ों के आधार पर यह निर्विवाद था कि:
- याचिकाकर्ता को नाम, जेंडर और फोटो बदलवाने का पूरा अधिकार है,
- और Annexure 1 में सूचीबद्ध सभी दस्तावेज़ों (जिसमें स्कूल/बोर्ड/विश्वविद्यालय की प्रमाणपत्र भी शामिल हैं) में संशोधन लागू होता है।
3. समान प्रकृति के मामलों का उद्धरण
कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्णयों का संदर्भ दिया:
- Beoncy Laishram v. State of Manipur (2025) — मणिपुर हाईकोर्ट ने भी ऐसा ही निर्देश दिया था।
- Jane Kaushik v. Union of India (2025 SC) — सुप्रीम कोर्ट ने Act व Rules के उद्देश्य और महत्व स्पष्ट किए।
- Vedant Maurya @ Kumari Soni v. State of U.P. — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समान परिस्थितियों में नाम परिवर्तन का आदेश दिया था।
कई अन्य हाईकोर्ट्स ने भी अधिनियम का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने पर बल दिया है ताकि भेदभाव को रोका जा सके।
अंतिम निर्देश
हाईकोर्ट ने:
- क्षेत्रीय सचिव के आदेश को क्वैश कर दिया,
- याचिका को स्वीकृत किया,
- और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के शैक्षणिक दस्तावेज़ों में आवश्यक बदलाव कर नई मार्कशीट/प्रमाणपत्र जारी करें।
यह निर्णय ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सम्मान, पहचान और आत्म-निर्णय के अधिकारों को पुष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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