दिल्ली हाईकोर्ट ने मृत वकीलों के परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया

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📄 दिल्ली हाईकोर्ट ने मृत अधिवक्ताओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए बार काउंसिल से व्यापक कल्याणकारी नीतियाँ बनाने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान राहत अपर्याप्त है और परिवारों को सुरक्षा कवच की ज़रूरत है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मृत वकीलों के परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मृत अधिवक्ताओं के परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की तत्काल आवश्यकता पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि अधिकांश वकीलों के परिवार उनकी पेशेवर आय पर ही निर्भर रहते हैं और उनके निधन के बाद आर्थिक संकट में आ जाते हैं।

यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने अधिवक्ता कमल खुराना की मां दर्शन रानी की अपील पर सुनवाई करते हुए दी। अपीलकर्ता ने मुख्यमंत्री अधिवक्ता कल्याण योजना (CMAWS) के तहत 10 लाख रुपये की सहायता राशि न मिलने के फैसले को चुनौती दी थी। खुराना का निधन 2 अगस्त 2023 को हुआ था।

अदालत का फैसला

कोर्ट ने पाया कि बीमा पॉलिसी में खुराना का नाम केवल 20 अक्टूबर 2023 से शामिल किया गया था, यानी उनकी मृत्यु के लगभग तीन महीने बाद। ऐसे में बीमा कंपनी पर अनुबंधात्मक दायित्व नहीं बनता। इस आधार पर अदालत ने दावा अस्वीकार करने के निर्णय को बरकरार रखा, लेकिन मां की परिस्थिति के प्रति संवेदना भी जताई।

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आंशिक मदद और व्यापक नीति की ज़रूरत

अदालत को बताया गया कि दिल्ली बार काउंसिल (BCD) पहले ही अपने इंडिजेंट एंड डिसेबल्ड लॉयर्स कमेटी के तहत दिसंबर 2023 से दो वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक आर्थिक सहायता स्वीकृत कर चुकी है।

हालांकि, पीठ ने कहा कि यह राहत पर्याप्त नहीं है और व्यापक नीति उपायों की आवश्यकता है। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और दिल्ली बार काउंसिल से आग्रह किया कि वे ऐसी नीतियाँ तैयार करें जिससे मृत अधिवक्ताओं के परिवार दयनीय स्थिति में न पहुंचें।

आगे की राह

अपील का निपटारा करते हुए अदालत ने अपीलकर्ता को स्वतंत्रता दी कि वह BCI या BCD के समक्ष और अधिक वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर सकती हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि उनके मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए।


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