पायलट थकान नियमों पर अवमानना याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से जवाब मांगा

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पायलट थकान प्रबंधन नियमों (CAR 2024) को लेकर इंडियन पायलट्स गिल्ड की अवमानना याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप है कि DGCA ने एयरलाइंस को अवैध रूप से छूट देकर FDTL नियमों को कमजोर किया।

पायलट थकान नियमों पर टकराव: दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से मांगा जवाब

पायलट थकान नियमों पर अवमानना याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने पायलटों की थकान से जुड़े नियमों को लेकर एक अहम अवमानना याचिका पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जवाब मांगा है। यह याचिका इंडियन पायलट्स गिल्ड (IPG) द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि DGCA ने CAR 2024 के तहत लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को कमजोर करते हुए एयरलाइंस को अनुचित छूट और विस्तार प्रदान किया।

न्यायमूर्ति अमित शर्मा की एकल पीठ ने DGCA को नोटिस जारी करते हुए उसके शीर्ष अधिकारियों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

याचिका के आरोप: नियमों का “अघोषित शिथिलीकरण”

IPG की अवमानना याचिका में कहा गया है कि DGCA ने अदालत के समक्ष दिए गए अपने पूर्व आश्वासनों के विपरीत, एयरलाइन-विशिष्ट Fatigue Management Schemes को मंजूरी दी, जो CAR 2024 में निर्धारित मानकों और समय-सीमा के अनुरूप नहीं हैं।

पायलट संघ का दावा है कि हाईकोर्ट ने पहले DGCA के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था कि नए FDTL नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा—

  • अधिकांश प्रावधान 1 जुलाई 2025 से, और
  • शेष प्रावधान 1 नवंबर 2025 से लागू होंगे।

इसके बावजूद, आरोप है कि DGCA ने अदालत की अनुमति लिए बिना एयरलाइंस को छूट दी, जिससे पायलट थकान से संबंधित सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता प्रभावित हुई।

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DGCA का पक्ष: “नियम स्थगित नहीं हुए हैं”

DGCA की ओर से पेश वकील ने अवमानना याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि हाईकोर्ट ने CAR 2024 की सामग्री (contents) को कभी “फ्रीज” नहीं किया था। उनके अनुसार, अदालत द्वारा केवल कार्यान्वयन की समय-सीमा को रिकॉर्ड किया गया था, न कि नियामक के वैधानिक अधिकारों को सीमित किया गया।

DGCA ने यह भी कहा कि Aircraft Act और Aircraft Rules के तहत उसे विशिष्ट परिस्थितियों में अस्थायी और मामले-विशेष छूट देने का अधिकार प्राप्त है। ऐसी छूटें सीमित अवधि के लिए होती हैं, समीक्षा के अधीन रहती हैं और इससे CAR 2024 की वैधता या अस्तित्व समाप्त नहीं होता।

नियामक ने यह भी तर्क दिया कि यही मुद्दा पहले से ही हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है, इसलिए अवमानना याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

इंडिगो को दी गई छूट बनी विवाद का केंद्र

याचिका में 5 दिसंबर को दी गई उस छूट का विशेष उल्लेख किया गया है, जब व्यापक उड़ान रद्दीकरण के बीच DGCA ने इंडिगो को उसके एयरबस A320 पायलटों के लिए रात्री संचालन (night operations) से जुड़े कुछ नए FDTL प्रावधानों से एकमुश्त, अस्थायी छूट दी थी।

पायलट संगठनों का कहना है कि यही छूट इस बात का उदाहरण है कि कैसे नए थकान नियमों को व्यवहार में कमजोर किया जा रहा है, जबकि इन नियमों का उद्देश्य उड़ान सुरक्षा और यात्रियों की जान की रक्षा करना है।

अवमानना याचिका की पृष्ठभूमि

यह अवमानना याचिका नवंबर 2025 में फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि DGCA ने जानबूझकर हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया और अदालत को दिए गए आश्वासनों के बावजूद एयरलाइंस को विस्तार और छूट प्रदान की।

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संघ का कहना है कि जिन Fatigue Management Schemes को मंजूरी दी गई, वे न तो CAR 2024 के अनुरूप हैं और न ही अदालत के समक्ष तय की गई समय-सीमा से मेल खाती हैं।

सुरक्षा बनाम नियामक विवेक

यह मामला एक बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या DGCA द्वारा दी गई छूटें वैधानिक विवेकाधिकार के दायरे में हैं, या वे अदालत के निर्देशों का उल्लंघन कर पायलट और यात्री सुरक्षा से समझौता करती हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट का आगामी फैसला न केवल पायलट थकान नियमों की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि न्यायिक निगरानी और नियामक स्वायत्तता के बीच संतुलन कैसे साधा जाए।

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