DND पुल पर कंपनी टोल नही लगा सकती, इलाहाबाद HC का निर्णय कायम, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा की 2001 से ही आम जनता ने टोल में कई सौ करोड़ रुपये गंवा दिए

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इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने वर्ष 2016 में DND पर यात्रा के लिए वसूले जाने वाले टोल पर रोक लगा दी थी. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोएडा और दिल्ली को जोड़ने वाले DND पुल पर कंपनी टोल टैक्स नही लगा सकती है. इस तरह कोर्ट ने नोएडा टोलब्रिज कंपनी की याचिका खारिज कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट से नोएडा टोल ब्रिज कॉर्पोरेशन लिमिटेड Noida Toll Bridge Corporation Limited ( NTBCL) को बड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायलय आज यानी 20 दिसंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें DND फ्लाईओवर पर टोल टैक्स वसूलने से रोक लगाई गई थी. दरअसल, NTBCL ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ चुनौती दी थी, जिसको सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस आदेश के आने के बाद इस कंपनी के शेयरों में 5 प्रतिशत का लोअस सर्किट लगा है.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि ‘टोल वसूलना जारी रखने की कोई वजह नहीं है. हम टोल वसूलने के समझौते को अवैध मानते हैं. इसने निजी फर्म NTBCL को टोल संग्रह सौंपने के लिए नोएडा प्राधिकरण की खिंचाई की, जिसके पास टोल वसूलने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई थी रोक

ज्ञात हो कि साल 2012 में फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (FNRWA) ने डीएनडी फ्लाइओवर पर टोल वसूलने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर साल 2016 में हाई कोर्ट का फैसला आया था. इस दौरान हाई कोर्ट ने टोल टैक्स पर रोक लगाते हुए कहा था कि 9.2 किलोमीटर लंबे, 8 लेन वाले दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे पर टोल टैक्स वसूलना मनमाना है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एनटीबीसीएल ने फ्लाईवे के निर्माण की लागत और एक्सप्रेसवे के 2001 में खुलने के बाद से उचित लाभ दोनों पहले ही वसूल कर लिया था.

शीर्ष अदालत ने वहीं, नोएडा प्राधिकरण को भी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि एनटीबीसीएल के साथ समझौते में टोल कलेक्शन के लिए निर्धारित समय-सीमा का अभाव था, जिससे प्रभावी रूप से रियायतग्राही को उपयोगकर्ताओं से स्थायी रूप से शुल्क वसूलने की अनुमति मिल गई.

बेंच ने कहा कि NTBCL को दी गई रियायत और समझौते की भाषा ऐसी है कि यह हमेशा के लिए लागू रह सकता था. इस प्रकार NTBCL को हमेशा लाभ पहुंचाया जा रहा था. कोर्ट ने माना है कि गलत समझौते की वजह से आम जनता ने कई सौ करोड़ रुपये गंवा दिए हैं. NTBCL ने उनको धोखा दिया है इसलिए उपयोगकर्ता या टोल शुल्क जुटाने का कोई कारण नहीं है.

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