Assessment of loss of future income depends on actual effect on income: Supreme Court reduces compensation awarded by High Court and Tribunal
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि भविष्य की आय की हानि (loss of future earnings) के लिए क्षतिपूर्ति का निर्धारण दावा करने वाले की वास्तविक आय-क्षमता पर विकलांगता के प्रभाव पर निर्भर करेगा, न कि मात्र विकलांगता की प्रतिशतता पर।
⚖️ पृष्ठभूमि:
दावेकर्ता (विभोर फियालोक) ने 2014 में हुए सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की थी।
- मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने ₹4,24,000/- का मुआवजा 9% वार्षिक ब्याज दर के साथ दिया।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुआवजे को बढ़ाकर ₹30,91,482/- कर दिया।
- हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (UPRTC) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
🧾 सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ और विश्लेषण:
🔹 भविष्य की आय की हानि का मूल्यांकन:
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा:
“भविष्य की आय की हानि के अंतर्गत क्षतिपूर्ति का मूल्यांकन उस विकलांगता के दावेकर्ता की आय-क्षमता पर पड़े प्रभाव पर निर्भर करता है।”
- पीठ ने पाया कि ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट दोनों ने ‘स्थायी कार्यात्मक विकलांगता’ की बात तो की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि यह विकलांगता किस हद तक शरीर की समग्र कार्यक्षमता को प्रभावित करती है।
- यदि विकलांगता किसी विशेष अंग तक सीमित हो, तो यह देखना आवश्यक है कि उस अंग की हानि ने शरीर के समग्र कार्य पर कितना प्रभाव डाला, तभी भविष्य की आय की हानि के लिए क्षतिपूर्ति तय की जा सकती है।
🔹 दलीलों से परे जाकर साक्ष्य देना अवैध:
- कोर्ट ने कहा कि दावे की याचिका में यह नहीं बताया गया था कि दावेकर्ता किसी एंटरप्राइज में कार्यरत थे, फिर भी ट्रिब्यूनल ने इस पर साक्ष्य लेने की अनुमति दी, जो प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण था।
🔹 भविष्य की आय में वृद्धि का लाभ (future prospects) नहीं मिल सकता:
“दावेकर्ता के पास पहले से ही स्वयं की आय का स्रोत था, जो चोट के कारण समाप्त नहीं हुआ, इसलिए भविष्य की आय की वृद्धि का लाभ नहीं दिया जा सकता,” — सुप्रीम कोर्ट
📌 अंतिम निर्णय:
सुप्रीम कोर्ट ने कुल ₹9,06,100/- मुआवजा (9% वार्षिक ब्याज सहित, दावे की याचिका की तारीख से) तय किया और हाईकोर्ट तथा ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई अधिशेष क्षतिपूर्ति को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया।
अपील स्वीकार की गई।
मामला: उत्तर प्रदेश रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन बनाम विभोर फियालोक व अन्य
SLP (Civil) No(s). 2738-2739 of 2019
🔍 महत्वपूर्ण सिद्धांत जो सामने आए:
- “स्थायी विकलांगता” ≠ “भविष्य की आय का स्वत: नुकसान”
- केवल शारीरिक हानि के प्रतिशत से नहीं, बल्कि उसके कार्यात्मक प्रभाव से क्षतिपूर्ति तय होनी चाहिए।
- दावों में स्पष्ट रूप से न कही गई बातों पर साक्ष्य नहीं लिए जा सकते।
- भविष्य की संभावित आय में वृद्धि तभी दी जा सकती है जब यह साबित हो कि आय पर वास्तव में विपरीत प्रभाव पड़ा है।
