केजरीवाल को 7 मई को अंतरिम जमानत पर बहस संभव लेकिन सुप्रीम कोर्ट का पीएमएलए की धारा 70 पर सवाल

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संकेत दिया कि वह जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का फैसला कर सकता है, हालांकि उसने स्पष्ट किया कि उसने अभी तक इस मामले पर फैसला नहीं किया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से निर्देश लेने को कहा कि क्या अंतरिम जमानत दी जा सकती है और उस पर क्या शर्तें लगाई जा सकती हैं।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ की मौखिक टिप्पणियाँ केजरीवाल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के अंत में आईं, जिसमें ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा, “इस मामले में समय लग सकता है। लेकिन अगर मामले में समय लगता है, तो हम चुनाव के कारण अंतरिम जमानत के सवाल पर विचार कर सकते हैं।”

“हम अगले सप्ताह 7 मई 2024 को आपकी बात सुनेंगे और चुनाव के कारण उन्हें अंतरिम जमानत देने के मुद्दे पर तैयार रहेंगे। इस पहलू पर उचित निर्देश लें और क्या शर्तें लगाने की जरूरत है। हम आपसे यह सब सिर्फ इसलिए पूछ रहे हैं आपको आश्चर्यचकित होने की जरूरत नहीं है,” पीठ ने ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू से पूछा।

इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की।

न्यायमूर्ति खन्ना ने राजू से इस पहलू पर भी जवाब देने को कहा कि “क्या केजरीवाल अब भी अपनी आधिकारिक फाइलों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं”।

इस पर एएसजी ने कहा, “आपके बयान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाएगा।”

न्यायमूर्ति खन्ना ने तब कहा, “खुली अदालत के साथ यही समस्या है।” उन्होंने कहा कि अदालत यह नहीं कह रही है कि वह जमानत देगी या नहीं देगी।

न्यायमूर्ति खन्ना ने दोनों पक्षों से कहा, “हम किसी भी तरह से नहीं कह रहे हैं। हम इसके बारे में खुले हैं। कुछ भी न मानें।”

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केजरीवाल को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था ।

सुनवाई के दौरान पीठ ने ईडी से पूछा और कहा, “आपने धारा 70 लागू की है। इसलिए, आपके अनुसार, मुख्य आरोपी AAP है। एक अपराध के लिए दो मुख्य आरोपी नहीं हो सकते। उन पर सीबीआई द्वारा मुकदमा नहीं चलाया जाता है।” जांच चल रही थी लेकिन उन पर (केजरीवाल) आरोपपत्र दायर नहीं किया गया है।”

राजू ने स्पष्ट किया, “न्याय निर्णय की आवश्यकता नहीं है।”

इस पर जस्टिस खन्ना ने फिर पूछा, “अगर आप मुख्य आरोपी है, आज तक आप के खिलाफ न्यायनिर्णयन की कार्यवाही शुरू नहीं हुई है तो क्या आप केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकते हैं?”

एएसजी राजू ने जवाब दिया, “बिना निर्णय के जब्ती हो सकती है और यही अधिनियम की योजना है।”

केजरीवाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी, “मेरे मामले में सभी सह-अभियुक्तों ने पहले कुछ नहीं कहा। फिर उन्होंने अचानक कुछ कहा। किसी राजनीतिक दल द्वारा किए गए किसी भी काम के लिए उसके संयोजक, कोषाध्यक्ष आदि को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।”

क्या है ये धारा 70?

पीएमएलए की धारा 70 कंपनियों की ओर से की जाने वाली मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए लगाई जाती है। इसमें कहा गया है कि जब कोई कंपनी मनी लॉन्ड्रिंग करती है, तो हर एक व्यक्ति जो अपराध के समय उस कंपनी का प्रभारी या जिम्मेदार था, उसे भी दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इस धारा में ये भी प्रावधान है कि किसी व्यक्ति पर मुकदमा तब नहीं चलाया जाएगा, जब वो ये साबित कर सके कि मनी लॉन्ड्रिंग उसकी जानकारी के बगैर हुई थी या उसने इसे रोकने की भरसक कोशिश की थी।

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इस धारा में एक अपवाद भी जोड़ा गया है। इसके मुताबिक, कंपनी एक अलग लीगल एंटीटी भी है, लिहाजा उसके कर्मचारियों या उसे चलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ स्वतंत्र रूप से भी मुकदमा चलाया जा सकता है।

इस मामले में कैसे आई पीएमएलए की धारा 70?

दरअसल, सुनवाई के दौरान पीठ ने ईडी से पूछा और कहा, “आपने धारा 70 लागू की है। ईडी ने आम आदमी पार्टी को ‘कंपनी’ माना है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया था कि सबूतों से पता चलता है कि आम आदमी पार्टी ने रिश्वत के पैसों का इस्तेमाल गोवा में चुनाव प्रचार के लिए किया था।

उन्होंने कहा था कि इस मामले में आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ और उसने अपराध किया. इस मामले में आम आदमी पार्टी ‘व्यक्तियों का समूह’ है। और पीएमएलए की धारा 70 दायरे में सिर्फ ‘रजिस्टर्ड कंपनियां’ ही नहीं बल्कि ‘व्यक्तियों का समूह’ भी आता है।

एएसजी राजू ने दलील दी थी कि हो सकता है कि आप पूरी तरह से एक कंपनी न हों, लेकिन आप ‘व्यक्तियों का संघ’ हैं, इसलिए आम आदमी पार्टी एक कंपनी हुई।