इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले में दो आरोपियों के खिलाफ घटना के पाँच साल बाद दायर चार्जशीट पर संज्ञान को अवैध बताते हुए मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि सामान्य प्रचलन कानून का विकल्प नहीं हो सकता।
⚖️ चोरी मामले में 5 साल की देरी से चार्जशीट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, पूरी कार्यवाही रद्द
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले में पाँच साल की देरी से दायर चार्जशीट पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो आरोपियों के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कोई भी सामान्य प्रचलन स्थापित कानून का स्थान नहीं ले सकता।”
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की एकलपीठ ने पारित किया।
📌 क्या है मामला?
फिरोजाबाद के थाना नॉर्थ में अप्रैल 2019 में मोटरसाइकिल चोरी की एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में पाँच आरोपियों के खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी। हालांकि, जांच के दौरान सामने आए दो अन्य आरोपियों — सूरज ठाकुर और अवनीश कुमार — के विरुद्ध चार्जशीट लगभग पाँच साल की देरी से 24 नवंबर 2024 को दाखिल की गई।
तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस देरी के बावजूद आरोप पत्र पर तुरंत संज्ञान ले लिया। इसके खिलाफ दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए संज्ञान आदेश और कार्यवाही को चुनौती दी।
⚖️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियाँ
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन धाराओं में अधिकतम सजा तीन वर्ष तक की है, उनमें दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत तीन साल की अवधि के भीतर ही संज्ञान लिया जाना अनिवार्य है।
समय-सीमा समाप्त होने के बाद लिया गया संज्ञान पूरी तरह अवैध है।
जब मजिस्ट्रेट की ओर से यह तर्क दिया गया कि अदालतों में सामान्यत: विस्तृत जांच किए बिना ही संज्ञान ले लिया जाता है, तो कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सामान्य प्रचलन कानून से ऊपर नहीं हो सकता।
🧑⚖️ अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस और अदालत दोनों की इस तरह की सुस्ती संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त “त्वरित न्याय के अधिकार” का सीधा उल्लंघन है।
📍 अंतिम आदेश
- सूरज ठाकुर और अवनीश कुमार के खिलाफ संज्ञान आदेश और समस्त कार्यवाही रद्द
- अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा
- न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान को निर्देश कि न्यायिक अधिकारियों को संज्ञान से जुड़े कानूनी प्रावधानों का समुचित प्रशिक्षण दिया जाए
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