Advocate Jharkhand: ‘अधिवक्ता सुरक्षा कानून’ के लिए वकील करेंगे आंदोलन, क्योकि राज्य में वकीलों पर हमले की खबर बढ़ी-

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ADVOCATE PROTECTION ACT अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू नहीं करने और नए हाईकोर्ट परिसर में वकीलों को पर्याप्त चैंबर और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने पर वकील आक्रोशित हैं और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

Advocates of Jharkhand झारखंड के वकील आंदोलन के मूड में है। अधिवक्ता सुरक्षा कानून ADVOCATES PROTECTION ACT लागू नहीं करने और नए हाईकोर्ट परिसर में वकीलों को पर्याप्त चैंबर और अन्य सुविधाएं नहीं मिलने पर वकील आक्रोशित हैं और आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

21 अक्तूबर तक सरकार ने इन दोनों बिंदुओं पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो किसी भी दिन वकील न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने के साथ विरोध प्रदर्शन भी करेंगे। बार कौंसिल का एक प्रतिनिधिमंडल अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू कराने के लिए राज्यपाल से मिल कर ज्ञापन सौंपेगा।

राज्य के विधि विभाग के पास लंबित-

Bar Council Dy. Chairman बार कौंसिल के उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल के अनुसार झारखंड में अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने के लिए तीन साल से प्रयास चल रहा है। जिन राज्यों में यह कानून लागू है, वहां से एक्ट मंगाकर अध्ययन किया गया। इसके बाद मध्यप्रदेश में लागू कानून को आधार मानकर बार कौंसिल ने अधिनियम का प्रारूप तैयार किया। कौंसिल अपनी जनरल बॉडी की मीटिंग में इसे पास कराकर सरकार को अंतिम मंजूरी के लिए भेज भी चुका है। लेकिन अधिनियम राज्य के विधि विभाग के पास लंबित है। मुख्यमंत्री और राज्यपाल को कई बार ज्ञापन दिया गया है। राज्य में वकीलों पर हमले की खबर बढ़ी है। ऐसे में कानून लागू करने की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो कौंसिल जल्द ही आगे की रणनीति तय करेगी।

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प्रस्तावित एक्ट के मुख्य प्रावधान-

प्रस्तावित एक्ट में अधिवक्ताओं को धमकी देने और मारपीट करने को गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इसके तहत तीन साल की सजा का भी प्रावधान किया गया है। प्रारूप में अधिवक्ताओं पर प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पुलिस को राज्य बार कौंसिल से अनुमति लेने की व्यवस्था की गई है अधिवक्ताओं से दुर्व्यवहार पर सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा योजना से जोड़ते हुए कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने का प्रावधान किया गया है। प्रारूप पर विधि विभाग की मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट में रखा जाएगा।

सरकार के कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अधिनियम को विधानसभा में रखा जाएगा। विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद यह अधिनियम पूरे राज्य में लागू हो जाएगा। यदि सरकार तत्काल इसे लागू करना चाहे तो अध्यादेश जारी कर लागू कर सकती है।

नए हाईकोर्ट परिसर में सुविधा देने पर सरकार नहीं है राजी-

झारखंड हाईकोर्ट JHARKHAND HIGH COURT के नए परिसर में कम से कम 1500 वकीलों के लिए चैंबर बनाने की मांग हाईकोर्ट एसोसिएशन कर रहा है। इसके लिए सरकार, हाईकोर्ट बिल्डिंग कमेटी से भी एसोसिएशन ने मांग की है। पहले सरकार ने कहा था कि नए डीपीआर में इसका प्रावधान किया जाएगा।

नए डीपीआर तैयार होने के बाद भी वकीलों के लिए 1500 चैंबर नहीं बनाया जा रहा है। इस कारण वकीलों में रोष है। वकीलों ने पर्याप्त चैंबर, पुस्तकालय, मनोरंजन गृह, महिला वकीलों के लिए अलग हॉल बनाने की मांग की थी, लेकिन डीपीआर में इसका जिक्र नहीं किया गया है। एडवोकेट एसोसिएशन ने इसके लिए हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।

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वकीलों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वह नए परिसर में शिफ्ट नहीं होंगे।

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