नई UGC इक्विटी रेगुलेशंस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 के नियम बहाल; 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर रोक लगाते हुए उन्हें फिलहाल स्थगित कर दिया है और 2012 के UGC नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

नई UGC इक्विटी रेगुलेशंस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 के नियम बहाल; 19 मार्च को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे के आदेश तक 2012 के UGC रेगुलेशंस ही प्रभावी रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुनवाई के बाद बताया कि हाल ही में अधिसूचित UGC रेगुलेशंस को सुप्रीम कोर्ट ने abeyance (स्थगन) में रखा है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक आगे आदेश न हों, तब तक 2012 के नियम लागू रहेंगे।

“आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारी रिट याचिका पर सुनवाई की और हाल ही में बनाए गए UGC रेगुलेशंस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 2012 के UGC रेगुलेशंस प्रभावी रहेंगे। मामले को 19 मार्च के लिए सूचीबद्ध किया गया है,”
— विष्णु शंकर जैन, ANI से बातचीत में

Clause 3(C) पर कोर्ट की गंभीर टिप्पणी

एक अन्य याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता विनीत जिंदल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों के अनुरूप है, विशेष रूप से रेगुलेशन 3(C) को लेकर। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रावधान जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा देता है, लेकिन इसमें केवल कुछ वर्गों को शामिल किया गया है और सामान्य वर्ग (General Category) को बाहर रखा गया है।

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जिंदल के अनुसार, इससे यह आभास होता है कि सामान्य वर्ग को अलग-थलग या लक्षित किया जा रहा है, जो संवैधानिक समानता के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम छात्रों के बीच विभाजन की स्थिति पैदा करते हैं।

“मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से माना कि इन नियमों में कमियां हैं और इन्हें पुनर्विचार व समीक्षा की आवश्यकता है,”
— विनीत जिंदल

‘भाषा में अस्पष्टता, दुरुपयोग की आशंका’

कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेगुलेशन 3(C) में “पूर्ण अस्पष्टता” है और इसके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि इस प्रावधान की भाषा को पुनः संशोधित (re-modify) किए जाने की जरूरत है।

क्या है नया UGC इक्विटी फ्रेमवर्क?

23 जनवरी को अधिसूचित नए UGC रेगुलेशंस का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना बताया गया था। इसके तहत:

  • हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equal Opportunity Centre (EOC) की स्थापना
  • SC, ST और OBC छात्रों के लिए विशेष समितियां और हेल्पलाइन
  • शिकायत निवारण और निगरानी के लिए अलग तंत्र

हालांकि, कई याचिकाकर्ताओं ने इन नियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और UGC Act, 1956 व संविधान के विरुद्ध बताया।

देशभर में विरोध, DU में प्रदर्शन

इन नियमों को लेकर देशभर में विरोध देखने को मिला। बुधवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में मुख्यतः सामान्य वर्ग के छात्रों ने प्रदर्शन कर नियमों को वापस लेने की मांग की। छात्रों का कहना था कि ये नियम समानता की बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए कोई बाध्यकारी प्रावधान नहीं है।

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शिक्षा मंत्री की सफाई

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नियमों के दुरुपयोग की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।

“मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कानून का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता,”
— धर्मेंद्र प्रधान

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद 2012 के UGC रेगुलेशंस ही लागू रहेंगे, और नए इक्विटी नियमों का भविष्य 19 मार्च की सुनवाई पर निर्भर करेगा।


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