तकनीकी खामी से परीक्षा से वंचित छात्रा को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष परीक्षा कराने का दिया आदेश

ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी के कारण परीक्षा से रोकी गई छात्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी। अदालत ने विश्वविद्यालय को विशेष परीक्षा आयोजित करने और समयबद्ध परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया।


तकनीकी खामी से परीक्षा से वंचित छात्रा को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विशेष परीक्षा कराने का दिया आदेश

प्रयागराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि तकनीकी त्रुटियों के कारण किसी छात्र को परीक्षा से वंचित करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने बीएससी (बायोलॉजी) प्रथम सेमेस्टर की छात्रा श्रेया पांडेय के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति विवेक सरन की एकलपीठ ने 12 जनवरी को यह आदेश उस याचिका पर पारित किया, जिसमें छात्रा ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी खामी के कारण उसका एडमिट कार्ड जारी नहीं हुआ और परिणामस्वरूप उसे प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया।

कॉलेज और विश्वविद्यालय का विवरण

याचिकाकर्ता श्रेया पांडेय, प्रयागराज के हंडिया स्थित उर्मिला देवी पीजी कॉलेज की छात्रा हैं, जो प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (राज्जू भैया) विश्वविद्यालय से संबद्ध है।

अनुच्छेद 21 के तहत परीक्षा में बैठने का अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि किसी छात्र को परीक्षा में बैठने से रोकना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त ‘जीवन और मानव गरिमा के साथ जीने के अधिकार’ का उल्लंघन है

अदालत ने टिप्पणी की:

“परीक्षा में सम्मिलित होना अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निहित गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ा है… और जब याचिकाकर्ता की ओर से कोई त्रुटि नहीं है, तो मात्र तकनीकी चूक के आधार पर उसके भविष्य को संकट में नहीं डाला जा सकता।”

विशेष परीक्षा और समयबद्ध परिणाम का निर्देश

अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए आदेश पारित किया कि:

“विश्वविद्यालय को निर्देशित किया जाता है कि वह शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए बीएससी (बायोलॉजी) प्रथम सेमेस्टर की विशेष परीक्षा दो सप्ताह के भीतर आयोजित करे और उचित समयावधि में परिणाम घोषित करे, ताकि याचिकाकर्ता अपनी आगे की पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रख सके।”

छात्र अधिकारों पर महत्वपूर्ण संदेश

यह आदेश उन मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म या प्रशासनिक खामियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही की कीमत छात्रों के शैक्षणिक भविष्य से नहीं चुकाई जा सकती

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Tags: Allahabad High Court, Right to Education, Article 21, University Exams, Technical Glitch, Special Examination, Student Rights

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