गलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में संविधान दिवस और मानवाधिकार सप्ताह का समापन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम में संवैधानिक मूल्य, मानवाधिकार, कानूनी शिक्षा और AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर दिया गया।
गलगोटियास लॉ स्कूल में संविधान दिवस समापन समारोह, जस्टिस राजेश बिंदल ने AI और कानूनी शिक्षा पर दिया संदेश
गलगोटियास यूनिवर्सिटी में संविधान दिवस व मानवाधिकार सप्ताह का भव्य समापन, जस्टिस राजेश बिंदल रहे मुख्य अतिथि
गलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने अपने महीने भर चले संविधान दिवस समारोह और मानवाधिकार सप्ताह का समापन 19 दिसंबर 2025 को विवेकानंद ऑडिटोरियम में एक गरिमामय कार्यक्रम के साथ किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत समारोहों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. प्रियम ने की। इसके बाद प्रो. (डॉ.) आदित्य टोमर, डीन, स्कूल ऑफ लॉ ने स्वागत संबोधन देते हुए संविधान को एक “जीवंत दस्तावेज” बताते हुए उसके सतत विकास और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
विश्वविद्यालय के माननीय चांसलर श्री सुनील गलगोटिया ने अपने संबोधन में संविधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के बीच गहरे अंतर्संबंध को रेखांकित किया।
जस्टिस राजेश बिंदल का संबोधन: AI, अनुभवात्मक शिक्षा और मानवाधिकार
मुख्य अतिथि के रूप में अपने प्रेरणादायी भाषण में न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने समकालीन कानूनी शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम (experiential learning) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग पर विस्तार से बात की।
उन्होंने संविधान के प्रावधानों और ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के माध्यम से मानवाधिकारों के विकास और संरक्षण की यात्रा को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखना एक संवैधानिक लोकतंत्र की बुनियाद है।
जस्टिस बिंदल ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कानूनी संसाधनों की बढ़ती उपलब्धता को सकारात्मक बताते हुए छात्रों को इनके विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग की सलाह भी दी।
छात्रों से संवाद: मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ एक इंटरएक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें जस्टिस बिंदल ने कानूनी पेशे में सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि कानून केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है।
विश्वविद्यालय नेतृत्व की दृष्टि
इस अवसर पर डॉ. ध्रुव गलगोटिया, CEO, गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने कहा:
“संविधान दिवस और मानवाधिकार सप्ताह जैसी पहल के माध्यम से गलगोटियास यूनिवर्सिटी छात्रों में संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना चाहती है, ताकि वे न्याय प्रणाली में सार्थक योगदान दे सकें।”
पुरस्कार, पुस्तक विमोचन और ‘लीगल ब्यूगल’ का लॉन्च
समारोह के दौरान सप्ताह भर की गतिविधियों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही:
- राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए
- तुलनात्मक विधि (Comparative Law) पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन हुआ
- स्कूल ऑफ लॉ की पत्रिका ‘Legal Bugle’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया
कार्यक्रम का समापन डॉ. मानसी द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
वैश्विक रैंकिंग में गलगोटियास यूनिवर्सिटी की मजबूत उपस्थिति
शैक्षणिक उपलब्धियों के मोर्चे पर भी गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
- QS World University Rankings 2026 में विश्वविद्यालय को 1201–1400 वैश्विक बैंड में स्थान मिला है।
- भारत की शीर्ष निजी यूनिवर्सिटियों में 15वां स्थान
- सभी भारतीय विश्वविद्यालयों (सरकारी व निजी) में 43वां स्थान
- Times Higher Education (THE) World University Rankings 2025 में
- भारतीय विश्वविद्यालयों में 45वां स्थान
- वैश्विक स्तर पर 1001–1200 बैंड में जगह
विश्वविद्यालय का कहना है कि ये उपलब्धियां शिक्षण गुणवत्ता, शोध प्रभाव, अंतरराष्ट्रीयकरण और उद्योग से जुड़ाव पर उसके रणनीतिक फोकस को दर्शाती हैं।
निष्कर्ष
संविधान दिवस और मानवाधिकार सप्ताह का यह समापन समारोह न केवल एक अकादमिक आयोजन था, बल्कि यह संदेश भी था कि कानूनी शिक्षा, संवैधानिक मूल्य और तकनीकी प्रगति—तीनों का संतुलित समावेश ही भविष्य के न्यायविदों को तैयार कर सकता है। गलगोटियास यूनिवर्सिटी का यह आयोजन इसी दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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