सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में विकलांग कैदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कठोर दिशानिर्देश जारी किए। शिकायत निवारण तंत्र, समावेशी शिक्षा, सहायक उपकरण उपलब्धता और उन्नत मुलाकात सुविधाओं को अनिवार्य किया। सभी राज्यों को चार माह में अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल करने का आदेश।
सुप्रीम कोर्ट ने विकलांग कैदियों के लिए राज्यों को दिए कड़े निर्देश: चार महीनों में अनिवार्य अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों में विकलांग कैदियों (Persons with Disabilities – PwD) के लिए एकसमान, मजबूत और मानवाधिकार-उन्मुख व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु ऐतिहासिक आदेश पारित किया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी राज्य की जेल प्रणाली में विकलांग कैदियों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह आदेश सत्यन नरवूर द्वारा दायर उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान पारित हुआ, जिसमें कहा गया था कि देश की अधिकांश जेलें आज भी दिव्यांग कैदियों को आवश्यक सुविधाएँ देने में असफल हैं—जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act, 2016) का स्पष्ट उल्लंघन है।
याचिका में उठाई गई मुख्य चिंताएँ
याचिकाकर्ता के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों की जेल मैनुअल और अवसंरचना में गंभीर कमियाँ हैं, जैसे—
- रैंप, हैंडरेल, व्हीलचेयर-अनुकूल मार्ग जैसी सुगम्य सुविधाओं का अभाव
- शिक्षा या पुनर्वास कार्यक्रमों में पर्याप्त समावेश की कमी
- शिकायत निवारण तंत्र का अभाव या अप्रभावी संचालन
- सहायक उपकरणों, श्रवण/दृष्टि सहायता और अन्य अनिवार्य संसाधनों की कमी
याचिकाकर्ता के वकील कलीस्वरम राज ने कोर्ट को अवगत कराया कि मौजूदा व्यवस्थाएँ न केवल गैर-मानवीय हैं, बल्कि दिव्यांग कैदियों की गरिमा, समानता और जीवन के अधिकार (Article 14 और Article 21) का भी उल्लंघन करती हैं।
L. Muruganantham केस पर निर्भरता
सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य पर जोर दिया कि L. Muruganantham बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में पहले ही विस्तृत दिशानिर्देश दिए जा चुके हैं, जिन्हें अब पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश (All India Applicability)
1️⃣ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एकसमान दिशानिर्देश लागू
L. Muruganantham केस में निर्धारित सभी सिद्धांत मुतातिस मुतांडिस देश की हर जेल में लागू होंगे।
2️⃣ विकलांग कैदियों के लिए स्वतंत्र और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र
कोर्ट ने आदेश दिया कि—
- शिकायतों का त्वरित पंजीकरण
- निरंतर निगरानी
- समयबद्ध समाधान
अनिवार्य किए जाएँ, ताकि कोई कैदी उपेक्षा, भेदभाव या दुर्व्यवहार का शिकार न हो।
3️⃣ जेलों में समावेशी शिक्षा सुनिश्चित की जाए
कोई भी कैदी केवल विकलांगता के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं रहेगा।
राज्यों को अनुकूल सुविधाएँ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
4️⃣ RPwD Act के सेक्शन 89 का पूर्ण अनुपालन
सभी जेल अधिकारी, स्टाफ और कानूनी सहायता प्रदाता इस प्रावधान के बारे में जागरूक हों और इसे अपने दैनिक कार्य में लागू करें।
5️⃣ सहायक उपकरण और मोबिलिटी एड्स की उपलब्धता
सभी राज्यों को सुनिश्चित करना होगा कि—
- सहायक उपकरण
- व्हीलचेयर
- श्रवण/दृष्टि सहायता
- मेडिकल/सपोर्टिव उपकरण
नियमित रूप से उपलब्ध और सुरक्षित रूप से रखे जाएँ।
6️⃣ बेंचमार्क विकलांग कैदियों के लिए बढ़ी हुई मुलाकात सुविधा
कोर्ट ने कहा कि ऐसे कैदियों को सतत पारिवारिक और सामाजिक समर्थन देने के लिए मुलाकात की सुविधाएँ उदार बनाई जाएँ।
चार महीनों में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार महीने के भीतर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाख़िल करने को कहा है, जिसमें शामिल हों—
- उठाए गए कदम
- की गई प्रगति
- भविष्य का रोडमैप
- संस्थागत व्यवस्थाएँ और कार्यान्वयन तंत्र
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश में जेल सुधार और मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पहली बार, विकलांग कैदियों की आवश्यकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत दृष्टिकोण से संबोधित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
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