उत्तर प्रदेश में आवासीय और विवाह हॉल के ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा दी। कोर्ट ने कहा—जब तक याचिकाकर्ता हाईकोर्ट नहीं जाते, तब तक यथास्थिति बनी रहे। साथ ही स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा हाईकोर्ट के निर्णय को प्रभावित नहीं करेगी।
UP में बिना प्रक्रिया ध्वस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: एक सप्ताह की अंतरिम सुरक्षा, यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश: UP में ध्वस्तीकरण पर रोक, याचिकाकर्ताओं को 1 सप्ताह की सुरक्षा
उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का सामना कर रहे दो याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 4 दिसंबर 2025, को एक सप्ताह की अंतरिम राहत प्रदान की।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा कि—
🔹 याचिकाकर्ताओं को एक सप्ताह तक ‘यथास्थिति’ का संरक्षण दिया जाता है।
🔹 इस दौरान प्राधिकरण आगे कोई ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं करेंगे।
🔹 याचिकाकर्ता त्वरित रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट में उचित राहत के लिए आवेदन करें।
🔹 क्यों दी गई यह अंतरिम राहत?
याचिकाकर्ताओं ने बताया:
- उनके आवासीय परिसर और विवाह हॉल का आंशिक ध्वस्तीकरण पहले ही किया जा चुका है
- आगे भी ध्वस्तीकरण की आशंका है
- कार्रवाई कानून की उचित प्रक्रिया (due process) का पालन किए बिना की गई
कोर्ट ने माना कि चूंकि आंशिक ढांचा पहले ही गिराया जा चुका है, इसलिए अंतरिम संरक्षण उचित है।
🔹 यथास्थिति बनाए रखने का मतलब क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
- न तो याचिकाकर्ता निर्माण/बदलाव करेंगे
- न ही राज्य प्राधिकरण किसी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई करेंगे
- जैसे स्थिति आज है, वैसी ही 1 सप्ताह तक बनी रहेगी
🔹 हाईकोर्ट की स्वतंत्रता पर स्पष्ट टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया:
“यह अंतरिम संरक्षण हाईकोर्ट की सुनवाई या उसके निर्णय को किसी प्रकार प्रभावित नहीं करेगा।”
इसका अर्थ है—
- हाईकोर्ट मामले को स्वतंत्र रूप से सुनेगा
- सुप्रीम कोर्ट की यह अंतरिम राहत सिर्फ अस्थायी सुरक्षा है
- हाईकोर्ट अपने विवेक से स्थगन या अन्य आदेश जारी करेगा
🔹 याचिकाकर्ताओं की मांग क्या थी?
वे चाहते थे कि:
- प्राधिकरणों को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना आगे कोई ध्वस्तीकरण करने से रोका जाए
- उन्हें स्थायी/लंबी अवधि की सुरक्षा मिले
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अंतरिम सुरक्षा दी कि उचित है की आप इलाहाबाद हाईकोर्ट जाये।
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