सुप्रीम कोर्ट ने Crocs Inc. के पासिंग ऑफ मुकदमों को पुनर्जीवित करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। Bata, Relaxo, Liberty और अन्य भारतीय ब्रांडों के खिलाफ Crocs के मामले अब ट्रायल कोर्ट में दोबारा सुने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रश्न भविष्य के लिए खुला रहेगा।
🔍 क्रॉक्स बनाम भारतीय फुटवियर कंपनियां: सुप्रीम कोर्ट ने पासिंग ऑफ मुकदमों को दी हरी झंडी, SLP खारिज
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्रॉक्स के पासिंग ऑफ मुकदमे फिर शुरू होंगे
सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशीय पीठ—जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराबड़े—ने अमेरिकी कंपनी Crocs Inc. द्वारा दायर पासिंग ऑफ मुकदमों को पुनर्जीवित करने वाले जुलाई 2025 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। इसके साथ ही Crocs के Bata, Relaxo, Liberty, Aqualite और Action Shoes जैसी भारतीय फुटवियर कंपनियों के खिलाफ मुकदमे फिर से ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेंगे।
पीठ ने कहा—
“हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। हाईकोर्ट ने केवल मुकदमों को ट्रायल कोर्ट में बहाल किया है… ट्रायल कोर्ट किसी टिप्पणी से अप्रभावित होकर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले।”
सभी SLPs (Special Leave Petitions) खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का प्रश्न खुला रहेगा, यानी भविष्य में यह व्यापक न्यायिक परीक्षण के लिए वापस आ सकता है।
“भारत में ट्रेडमार्क नहीं, केवल डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन”—न्यायालय की अहम टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार ने कहा:
“भारत में Crocs को इस डिजाइन का ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। केवल डिजाइन रजिस्ट्रेशन था।”
यह टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि Crocs अपने प्रसिद्ध ‘छिद्रों वाले क्लॉग डिजाइन’ पर ट्रेड ड्रैस के आधार पर दावा कर रही है, न कि ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन पर।
पासिंग ऑफ एक कॉमन लॉ राइट—अखिल सिब्बल की दलीलें
Crocs की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि—
- Passing Off और Infringement दो अलग-अलग कानूनी अधिकार हैं
- Infringement पंजीकरण पर निर्भर, जबकि
- Passing Off उपयोग, प्रतिष्ठा और goodwill पर आधारित होता है
सिब्बल ने दलील दी:
“Designs Act passing off को प्रतिबंधित नहीं करता। Passing off एक कॉमन लॉ रेमेडी है जो ट्रेड ड्रेस और प्रतिष्ठा की रक्षा करता है।”
उन्होंने ट्रेडमार्क अधिनियम की धारा 27(2) का हवाला देते हुए बताया कि यह धारा स्पष्ट करती है कि ट्रेडमार्क कानून पासिंग ऑफ के अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश कायम—ट्रायल कोर्ट करेगा मेरिट पर फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 के अपने निर्णय में कहा था कि Crocs के पासिंग ऑफ दावे सुनने योग्य हैं और ट्रायल कोर्ट ने गलती से उन्हें खारिज किया था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज होने के बाद:
- मुकदमे पुनर्जीवित रहेंगे
- ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से यह तय करेगा कि क्या भारतीय कंपनियों द्वारा तैयार फुटवियर Crocs की goodwill का अनाधिकृत लाभ उठाता है
सुप्रीम कोर्ट ने पुनः स्पष्ट किया:
“ट्रायल कोर्ट किसी भी पूर्व टिप्पणी या इस SLP की खारिजी से प्रभावित न हो।”
भारतीय फुटवियर उद्योग पर असर
यह फैसला भारतीय जूता उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है:
✔ Crocs को अंतरिम जीत
उसके दावे सुनवाई योग्य माने गए हैं।
✔ भारतीय ब्रांडों के लिए चुनौती
उन्हें अपनी डिजाइन और व्यापारिक पहचान (trade dress) की स्वतंत्रता को साबित करना होगा।
✔ कानूनी प्रश्न खुला
क्या किसी उत्पाद के डिज़ाइन का ट्रेडमार्क न होने पर भी trade dress के आधार पर पासिंग ऑफ दावा कायम रह सकता है?
यह प्रश्न भविष्य में बड़ी बेंच के सामने जा सकता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय बौद्धिक संपदा कानून—विशेषकर Designs Act और Passing Off के संबंध—को लेकर बड़ा मार्गदर्शक माना जा रहा है। Crocs के मुकदमे अब ट्रायल कोर्ट में विस्तृत सुनवाई के लिए लौटेंगे, जबकि पूरे उद्योग को आगे आने वाले कानूनी परिणामों पर नजर रखनी होगी।
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