2020 दिल्ली दंगे: कड़कड़डूमा कोर्ट ने करावल नगर की भीड़ हिंसा पर ‘5’ वर्ष बाद FIR दर्ज करने के दिए निर्देश

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2020 Delhi riots: Karkardooma Court directs to register FIR on Karawal Nagar mob violence after ‘5’ years

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान करावल नगर में एक मुस्लिम परिवार पर लक्षित हिंसक हमले की शिकायत पर पुलिस को अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) इसरा जैदी ने शुक्रवार (24 जुलाई) को आदेश पारित करते हुए करावल नगर थाने के एसएचओ को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता रहीस अहमद की ओर से वर्ष 2020 में की गई शिकायत के आधार पर अलग FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच करें।

🔹 अदालत की टिप्पणी:

यह अदालत संतुष्ट है कि शिकायत में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के अंतर्गत संज्ञेय अपराधों के घटित होने के पर्याप्त संकेत हैं, और पुलिस ने उस समय इस पर उचित कार्रवाई नहीं की। इसलिए, आवेदन स्वीकार किया जाता है।
— JMFC इसरा जैदी

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी का निर्देश नहीं दिया जा रहा है। अदालत ने आदेश की प्राप्ति के सात दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही आदेश की प्रति उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी को भी भेजी गई है ताकि निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। अगली सुनवाई की तारीख 31 जुलाई 2025 तय की गई है।

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🔹 मामला क्या है?

शिकायतकर्ता रहीस अहमद ने 2020 में याचिका दाखिल कर यह मांग की थी कि करावल नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को उनकी विशेष शिकायत पर अलग FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।

शिकायत के अनुसार:

  • 25 फरवरी 2020 को सुबह 9:30 बजे, रहीस अहमद और उनके परिवार पर लाठी, लोहे की रॉड, और पेट्रोल बम से लैस भीड़ ने हमला किया
  • हमलावरों ने सांप्रदायिक उकसावे वाले नारे लगाए और जान से मारने की धमकी दी।
  • आरोपियों में शामिल थे: विनोद, टिंकू, आदेश शर्मा, महेश, सुरेश, मोनू, अंशु पंडित, राजपाल और अन्य।
  • घर में लूटपाट, गहनों व नकदी की चोरी, टेंट हाउस में आगज़नी, और पत्थरबाजी की घटनाएं दर्ज की गईं।
  • हेट स्पीचउकसावे वाले भाषणों के जरिए हिंसा भड़काने के आरोप भी लगाए गए।

🔹 पुलिस की स्थिति और अदालत का विश्लेषण

दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्यवाही रिपोर्ट में बताया कि FIR संख्या 147/148/149/427/436 पहले से दर्ज की जा चुकी है, जिसमें 29 शिकायतों को मिलाकर जांच चल रही है। रहीस अहमद की शिकायत भी इसी में जोड़ी गई थी।

हालांकि, अदालत ने कहा कि:

  • रहीस की शिकायत में घटना का समय सुबह 9:30 बजे है, जबकि पहले दर्ज FIR में घटना का समय 11:30 बजे है।
  • पहली FIR आजाद सिंह की दुकान पर हुई अलग घटना पर आधारित है और इसमें उकसावे वाले नारों या लक्षित हिंसा का कोई ज़िक्र नहीं है।
  • वर्तमान शिकायत में भिन्न आरोपी, भिन्न स्थान, और भिन्न समय का उल्लेख है, जो इसे एक स्वतंत्र आपराधिक कृत्य बनाता है।
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🔹 कानूनी महत्व

इस आदेश के साथ, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

  • हर पीड़ित की शिकायत की स्वतंत्र पहचान और अलग जांच आवश्यक है।
  • “क्लबिंग” (एकीकृत करना) का दुरुपयोग कर पुलिस वास्तविक घटनाओं की अनदेखी नहीं कर सकती।

⚖️ निष्कर्ष

कड़कड़डूमा कोर्ट का यह आदेश उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में न्यायिक जवाबदेही और पुलिस निष्क्रियता के प्रश्नों को उजागर करता है। यह एक महत्वपूर्ण मिसाल है जो यह रेखांकित करता है कि पीड़ितों की विशिष्ट शिकायतें अलग और निष्पक्ष जांच की हकदार हैं, विशेषकर जब मामला लक्षित सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा हो।

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