Supreme Court rejects Justice Yashwant Verma’s petition, says- Parliament has supreme right on impeachment process
देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इन-हाउस जांच समिति की रिपोर्ट और पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना की सिफारिश को चुनौती दी थी। इस सिफारिश में दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत रहते हुए उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के बाद बरामद जली हुई बेहिसाब नकदी मामले में उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) कार्यवाही शुरू करने की बात कही गई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने 57 पन्नों के फैसले में कहा कि जस्टिस वर्मा ने इन-हाउस कार्यवाही पूरी होने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिससे उनकी याचिका पर विचार करने का भरोसा पैदा नहीं होता। अदालत ने कहा, “अगर प्रक्रिया में कोई खामी थी या सवाल उठाए जाने थे, तो याचिकाकर्ता को सीजेआई द्वारा शुरू की गई तथ्य-जांच पूरी होने का इंतजार नहीं करना चाहिए था।”
इन-हाउस प्रक्रिया की वैधता पर अदालत की मुहर
जस्टिस वर्मा ने दलील दी थी कि इन-हाउस प्रक्रिया का कोई संवैधानिक या वैधानिक आधार नहीं है और यह अतिरिक्त-संवैधानिक तंत्र है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि जज प्रोटेक्शन एक्ट, 1985 की धारा 3(2) के तहत ‘अन्यथा’ (otherwise) शब्द का दायरा इतना व्यापक है कि इसमें इन-हाउस प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई भी शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया कानूनी वैधता रखती है और इसे सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 141 के तहत दिए गए निर्णयों का समर्थन प्राप्त है।
संसद का अधिकार सर्वोच्च
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन-हाउस प्रक्रिया के तहत बनी समिति की रिपोर्ट और सीजेआई CJI की सिफारिश के बावजूद, महाभियोग कार्यवाही स्वतः शुरू नहीं होती। “संसद के पास यह पूर्ण अधिकार है कि वह चाहे तो कार्यवाही शुरू करे या न करे, भले ही रिपोर्ट हो या न हो,” अदालत ने कहा। इस तरह, अदालत ने यह स्थापित किया कि यह प्रक्रिया संसद के संवैधानिक अधिकार को न तो सीमित करती है और न ही उसके समानांतर कोई व्यवस्था बनाती है।
प्रक्रिया में कोई गंभीर विचलन नहीं
जस्टिस वर्मा ने आरोप लगाया था कि सीजेआई ने कानूनी प्रक्रिया से विचलन किया। अदालत ने सभी चरणों की समीक्षा कर कहा कि एकमात्र अपवाद यह था कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर कथित फोटो/वीडियो अपलोड किए गए, जबकि प्रक्रिया में इसका प्रावधान नहीं है। हालांकि, अदालत ने कहा कि चूंकि उस समय जस्टिस वर्मा ने इस पर आपत्ति नहीं की, यह अब fait accompli की स्थिति बन गई है।
मामला अब संसद के पाले में
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अब जब सुप्रीम कोर्ट और/या सीजेआई के स्तर पर कुछ लंबित नहीं है, याचिकाकर्ता उचित अवसर आने पर कानून के अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।” यानी अब यह पूरा मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में है और अदालत का इसमें कोई दखल नहीं रहेगा।
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