Ministry’s comment on delay in collegium recommendations ‘No time limit can be set’
“न्यायिक नियुक्तियों पर सरकार ने नहीं दी कॉलेजियम की लंबित सिफारिशों की जानकारी: राज्यसभा में जवाब अधूरा”
हाल ही में राज्यसभा में पूछे गए एक संसदीय प्रश्न के जवाब में, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा सुझाए गए उन नामों की संख्या साझा नहीं की, जिन पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई है। यह विषय न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और कार्यपालिका-न्यायपालिका के संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर करता है।
कांग्रेस सांसद विवेक के. तन्खा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान न्यायिक नियुक्तियों, सिफारिशों की स्वीकृति/अस्वीकृति, लंबित नामों और देरी के कारणों पर विस्तार से जानकारी मांगी थी।
हालाँकि, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने केवल यह बताया कि:
“उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति हेतु 178 प्रस्ताव सरकार और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच विभिन्न चरणों में विचाराधीन हैं, जबकि 193 रिक्तियों के लिए अब तक उच्च न्यायालयों से सिफारिशें प्राप्त नहीं हुई हैं।”
❓ सांसदों के मुख्य प्रश्न:
- 2019 से 2024 तक वर्षवार सिफारिशों की कुल संख्या (उच्च न्यायालयों व सुप्रीम कोर्ट के लिए);
- स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित सिफारिशों की संख्या;
- कौन-से नाम कितने समय से लंबित हैं और क्यों?
- क्या कुछ नामों को बार-बार वापस भेजा गया है? यदि हाँ, तो उनके विवरण क्या हैं?
इन सभी का प्रत्यक्ष उत्तर देने के बजाय, मंत्रालय ने केवल रिक्तियों व नियुक्त न्यायाधीशों की संख्या साझा की:
- 1 जनवरी 2020 से 18 जुलाई 2025 तक:
- सुप्रीम कोर्ट में 35 न्यायाधीश नियुक्त हुए;
- विभिन्न उच्च न्यायालयों में 554 न्यायाधीश नियुक्त हुए;
- उच्च न्यायालयों को 349 नाम भेजे गए।
🧾 मंत्रालय की सफाई:
मंत्रालय ने यह तर्क दिया कि:
“न्यायिक नियुक्ति की प्रक्रिया एक सतत, एकीकृत और सहयोगात्मक प्रक्रिया है, जिसमें कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों की भूमिका होती है। इसमें केंद्र और राज्य की विभिन्न संवैधानिक प्राधिकारियों से परामर्श आवश्यक होता है।”
इसलिए, कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती कि किसी नाम पर कब तक निर्णय होगा।
