कचरे वाले ने हैवानियत की सारी हदें पार कर 7 साल की बच्ची से किया दुष्कर्म, कोर्ट ने हैवान मान दिया तीन बार मृत्यदंड की सजा

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आज के समय में अपराधी मानसिकता वाले व्यक्तियों ने अमानवीयता की सभी सीमाएँ लांघ दी हैं। पहले भी यौन उत्पीड़न जैसे अपराध होते थे, लेकिन समाज के भय के कारण लोग अपनी पीड़ा को छुपा लेते थे। अब लोगों का न्याय प्रणाली में विश्वास जागृत हो चुका है। न्यायालय भी प्रयासरत है कि ऐसे अपराधियों को ऐसी सजा दी जाए कि भविष्य में कोई भी इन अपराधों को करने का साहस न कर सके।

हीरनगर में 27 फरवरी 2024 को एक ऐसा रेप का मामला सामने आया, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। एक कचरा बीनने वाले व्यक्ति ने सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। अपराधी की पहचान देवास के निवासी मंगल पवार के रूप में हुई। उसने खेल रही बच्ची को बहला-फुसला कर एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और वहां से भाग गया। हालाँकि, अब न्यायालय ने उसे उसके अपराधों के लिए कठोर सजा सुनाई है।

तीन बार मिलेगा मृत्यदंड

इस रेप केस का ट्रायल 10 महीने चला। इस दौरान बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर्स के अलावा कई अन्य लोगों की गवाही ली गई। आखिरकार अब जाकर कोर्ट ने इस केस को विरलतम माना है। फैसला सुनाने वाले द्वितीय अपर सत्र न्यायधीश एवं विशेष न्यायालय की जज सविता जडिया ने कहा कि रेपिस्ट की मानसिकता ऐसी है कि वो भविष्य में भी ऐसा कर सकता है। ऐसे में इसे विरलतम मामला माना जा रहा है। अपराधी को तीन बार मृत्यदंड की सजा दी जाती है।

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बच्ची की हालत देख कांप गए थे डॉक्टर्स

अपराधी ने मात्र सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। उसके प्राइवेट पार्ट्स बुरी तरह जख्मी हो गए थे। डॉक्टर्स को कई सर्जरी करनी पड़ी थी। बच्ची को बीस दिन एडमिट कर रखा गया था। उसकी गंभीर स्थिति देख उसके जिंदा बचने की उम्मीद नहीं थी लेकिन बच्ची ने चमत्कारिक तौर पर रिकवरी कर डाली थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में जब लड़की जिंदा बच जाती है तो उसकी जिंदगी मौत से भी बदतर हो जाती है। ऐसे में अपराधी को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिसके बाद पीड़िता का दर्द थोड़ा कम हो सके।

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