सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा GST छूट: छात्रों–प्रोफेशनल्स के हॉस्टल रेंट पर नहीं लगेगा 18% टैक्स

GST छूट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए हॉस्टल रेंट पर GST नहीं लगेगा, विधायी उद्देश्य को बताया मुख्य

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स को हॉस्टल रूप में दी गई आवासीय संपत्ति पर 18% GST नहीं लगेगा। कोर्ट ने कहा कि GST लगाने से बोझ छात्रों पर पड़ेगा और आवासीय उपयोग पर दी गई छूट का उद्देश्य विफल हो जाएगा। कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज की गई।


सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा GST छूट: छात्रों–प्रोफेशनल्स के हॉस्टल रेंट पर नहीं लगेगा 18% टैक्स

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि आवासीय मकान को हॉस्टल के रूप में छात्रों व वर्किंग प्रोफेशनल्स को किराए पर देने पर 18% GST नहीं लगेगा। कोर्ट ने माना कि यदि ऐसी स्थिति में GST लगाया गया, तो आखिरी बोझ छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर आएगा, जबकि कानून निर्माता का उद्देश्य आवासीय उपयोग पर कर-मुक्ति प्रदान करना है।

यह निर्णय कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राजस्व विभाग की दायर अपीलों पर आया, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।


🔹 पीठ की प्रमुख टिप्पणी

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा:

“यदि 18% GST लगाया जाता है, तो वह छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स पर बोझ बनकर पहुंचेगा। इससे आवासीय उपयोग पर दी गई छूट का मूल उद्देश्य ही पराजित हो जाएगा।”


🔹 मामले की पृष्ठभूमि

  • बुंगलूरू में स्थित 42 कमरों की आवासीय इमारत को
    Respondent No. 1 ने DTwelve Spaces Pvt. Ltd. को लीज पर दिया था।
  • DTwelve ने इसे लंबी अवधि की हॉस्टल सुविधा (3–12 महीने) के रूप में छात्रों और कर्मचारियों को दिया।
  • AAR और AAAR ने कहा कि यह वाणिज्यिक हाउसिंग है और GST छूट लागू नहीं होगी।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि यह आवासीय dwelling है, और अंतिम उपयोगकर्ता द्वारा आवास के रूप में उपयोग किया जा रहा है—इसलिए छूट मिलेगी।
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राजस्व विभाग ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।


🔹 राजस्व विभाग के तर्क

  • Entry 13 के तहत छूट तभी है जब—
    (a) सेवा हो,
    (b) residential dwelling हो,
    (c) और उसका उपयोग सेवा प्राप्तकर्ता द्वारा निवास हेतु हो।
  • यहाँ कंपनी (DTwelve) ने संपत्ति व्यक्तिगत निवास हेतु नहीं बल्कि हॉस्टल चलाने के लिए ली है।
  • हॉस्टल “सामाजिक आवास” जैसा है, सामान्य आवासीय dwelling नहीं।

🔹 उत्तरदाता का तर्क

  • छूट व्यक्ति-विशिष्ट नहीं, गतिविधि-विशिष्ट है।
  • Entry 13 कहती है—”residential dwelling for use as residence“.
  • अंतिम उपयोगकर्ता (students/working professionals) वास्तव में उसे residence की तरह उपयोग कर रहे हैं
  • हाईकोर्ट का निर्णय सही है।

🔹 सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

1️⃣ Residential Dwelling की परिभाषा

Court ने कहा:

“लंबी अवधि के निवास के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी आवासीय संरचना को residential dwelling कहा जाएगा।”

संपत्ति BBMP रिकॉर्ड में भी residential दर्ज थी।


2️⃣ अंतिम उपयोगकर्ता की residential-use सबसे महत्वपूर्ण

  • DTwelve Spaces द्वारा इसे सब-लीज करने से वास्तविक उपयोग नहीं बदलता
  • छात्र एवं प्रोफेशनल इसे घरों की तरह उपयोग कर रहे हैं।
  • इसीलिए GST छूट मिलेगी।

3️⃣ Narrow Interpretation से विधायी उद्देश्य विफल होगा

यदि यह कहा जाए कि:

“छूट केवल तभी मिलेगी जब lessee खुद उसमें रहे”

तो—

  • aggregation hostels
  • PG accommodations
  • company-leased staff quarters

—इन सभी पर 18% GST लग जाएगा, जो कानून की मूल भावना के विपरीत है।


4️⃣ Activity-specific exemption

Court ने स्पष्ट किया:

“Entry 13 एक activity-based exemption है, न कि person-based exemption।”

यानी—

✔ मकान रहन के लिए दिया जा रहा है
✔ आख़िरी उपयोग residential है

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तो GST छूट लागू रहेगी।


🔹 निष्कर्ष

  • हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार
  • राजस्व विभाग की अपीलें खारिज
  • हॉस्टल रेंट पर GST नहीं
  • Residential dwelling की छूट लागू
  • छूट इस कारण नहीं रोकी जा सकती कि संपत्ति कंपनी को लीज पर दी गई है

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