सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के 173 संरक्षित स्मारकों पर रिपोर्ट दाखिल न करने पर ASI के महानिदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया और व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया।
173 स्मारकों की रिपोर्ट न देने पर ASI को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
Supreme Court of India ने दिल्ली में स्थित 173 संरक्षित स्मारकों की स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल न करने को गंभीर मानते हुए Archaeological Survey of India (ASI) के महानिदेशक को अवमानना (Contempt) का नोटिस जारी किया है।
अदालत ने इसे अपने पूर्व आदेश का “जानबूझकर उल्लंघन” करार दिया और अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया।
“जानबूझकर अवमानना”: कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस Ahsanuddin Amanullah और जस्टिस N Kotiswar Singh की पीठ कर रही थी।
पीठ ने स्पष्ट कहा कि ASI द्वारा रिपोर्ट दाखिल न करना अदालत के आदेश की गंभीर अवहेलना है। कोर्ट ने कहा कि महानिदेशक को कारण बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में ASI के महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
किस मामले में हो रही थी सुनवाई
यह मामला दिल्ली के लोधी कालीन स्मारक “शेख अली की गुमटी” पर अतिक्रमण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। यह याचिका राजीव सूरी द्वारा दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर और वरिष्ठ अधिवक्ता Gopal Sankaranarayanan ने अदालत के समक्ष विभिन्न एजेंसियों द्वारा दाखिल रिपोर्टों का सार प्रस्तुत किया।
2 फरवरी के आदेश का पालन नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी को अपने आदेश में संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे दिल्ली के संरक्षित स्मारकों का निरीक्षण कर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।
हालांकि, सुनवाई के दौरान सामने आया कि ASI ने 173 स्मारकों के संबंध में कोई भी विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं किया।
इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे आदेश की अवहेलना माना।
अन्य एजेंसियों की रिपोर्ट भी अधूरी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि केवल ASI ही नहीं, बल्कि अन्य एजेंसियां भी पूरी तरह से अनुपालन करने में विफल रही हैं।
दिल्ली सरकार का पुरातत्व विभाग
दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग ने 19 स्मारकों का निरीक्षण किया, लेकिन:
- स्मारक-वार विस्तृत डेटा नहीं दिया
- जियो-मैपिंग और स्थान संबंधी जानकारी गायब रही
कोर्ट ने इसे अपर्याप्त मानते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
नगर निगम की स्थिति
Municipal Corporation of Delhi (MCD) ने 85 स्मारकों में से केवल 62 का सर्वेक्षण किया।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड अधूरा है और निगम को निर्देश दिया कि वह पूरी जानकारी, तस्वीरों और विवरण के साथ नया हलफनामा दाखिल करे।
NDMC की लापरवाही
New Delhi Municipal Council (NDMC) के मामले में स्थिति और भी गंभीर पाई गई।
54 स्मारकों में से केवल 2 का ही सर्वेक्षण किया गया था, जिस पर अदालत ने अप्रसन्नता जताई।
“सिर्फ सामान्य बयान पर्याप्त नहीं”
कोर्ट ने कहा कि एजेंसियों द्वारा केवल यह कहना कि आदेश का पालन किया गया है, पर्याप्त नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि हर स्मारक के संबंध में:
- विस्तृत रिपोर्ट
- सटीक स्थान
- जियो-मैपिंग
- तस्वीरें
दाखिल करना अनिवार्य है।
आदेश का व्यापक महत्व
यह मामला देश की सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संरक्षित स्मारकों के संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अदालत का यह रुख यह भी दर्शाता है कि सरकारी एजेंसियों को न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन करना होगा।
निष्कर्ष
दिल्ली के 173 संरक्षित स्मारकों पर रिपोर्ट दाखिल न करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख प्रशासनिक जवाबदेही को रेखांकित करता है। ASI के महानिदेशक को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश के साथ अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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