सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की रिट याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, कहा— फैसले के खिलाफ अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वनशक्ति समीक्षा फैसले के बाद ऐसी याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने जयराम रमेश की रिट याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, कहा— फैसले के खिलाफ अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश द्वारा पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearances) के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जब तीन न्यायाधीशों की पीठ पहले ही इस मुद्दे पर अपना मत दे चुकी है, तो उसी विषय पर अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका कैसे दायर की जा सकती है।


📌 कोर्ट के तीखे सवाल

सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा:

“यह याचिका किसलिए दायर की गई है? आप भली-भांति जानते हैं कि तीन न्यायाधीशों की पीठ इस पर अपना मत दे चुकी है।”

पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि न्यायालय के किसी फैसले के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका कैसे स्वीकार्य हो सकती है।


🧾 पृष्ठभूमि: वनशक्ति रिव्यू जजमेंट

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने मई 2025 के उस पूर्व निर्णय को रद्द कर दिया था, जिसमें केंद्र सरकार को पूर्वव्यापी कार्यकारी अधिसूचनाएं जारी करने से रोका गया था। समीक्षा निर्णय में केंद्र सरकार के ऑफिस मेमोरेंडम को प्रभावी रूप से मान्यता दी गई थी।

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याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वर्तमान रिट याचिका 2017 और 2021 की कार्यकारी अधिसूचनाओं को चुनौती देती है, साथ ही जनवरी 2026 में जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम को भी चुनौती दी गई है। वकील ने बताया कि जनवरी 2026 का मेमोरेंडम वनशक्ति समीक्षा निर्णय को लागू करने के लिए जारी किया गया था।


⚠️ “भारी जुर्माने के लिए तैयार रहें”

सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:

“सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में अधिसूचना जारी की है। इसे चुनौती देकर आप अप्रत्यक्ष रूप से फैसले की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। यह कैसे संभव है?”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी:

“क्या आपने इसे मीडिया में प्रचार के लिए दायर किया है? भारी जुर्माने के लिए तैयार रहें।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी अंतिम न्यायिक निर्णय को रिट याचिका के माध्यम से चुनौती देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जा सकता है।


🏛️ याचिका वापस

पीठ के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने नवंबर 2025 के निर्णय की समीक्षा याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ रिट याचिका वापस लेने का विकल्प चुना।


यह आदेश स्पष्ट करता है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम या समीक्षा निर्णयों को सीधे अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती, और ऐसा प्रयास न्यायालय की प्रक्रिया के विपरीत माना जा सकता है।


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