सुप्रीम कोर्ट ने Bunty Yadav v. State of Bihar मामले में हथियार अधिनियम व BNS की गंभीर धाराओं के बावजूद सिविल भूमि विवाद से जुड़े क्रॉस-केस को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की।
सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिस्वर सिंह ने Bunty Yadav v. State of Bihar में आरोपी (अपीलकर्ता) को अग्रिम जमानत प्रदान की। न्यायालय ने यह राहत इस आधार पर दी कि घटना एक सिविल भूमि विवाद की पृष्ठभूमि में हुई प्रतीत होती है और अपीलकर्ता की माता द्वारा पहले ही एक क्रॉस-केस दर्ज कराया जा चुका है।
मामला क्या था?
प्रकरण में अपीलकर्ता के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 126, 115(2), 109, 352 सहपठित धारा 3(5) तथा आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25(1B)(a), 26, 27 और 35 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार, 02 अगस्त 2024 की रात लगभग 2 बजे अपीलकर्ता अपने परिवार के सदस्यों के साथ सूचक के घर पहुँचा, गाली-गलौज और मारपीट की तथा कथित रूप से आग्नेयास्त्र से फायरिंग की। पुलिस ने मौके से दो जिंदा कारतूस, एक खोखा और एक चली हुई गोली बरामद करने का दावा किया।
बचाव पक्ष की दलीलें
अपीलकर्ता ने दलील दी कि भूमि विवाद के कारण उसे झूठा फँसाया गया है और फायरिंग की कहानी मनगढ़ंत है। किसी भी व्यक्ति को गोली नहीं लगी, जबकि कथित समय पर सूचक और अन्य लोग घर के भीतर थे। इसके अलावा, घटना से पहले हुए विवाद को लेकर अपीलकर्ता की माता द्वारा सूचक एवं अन्य के विरुद्ध पहले ही एक काउंटर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी थी।
हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके विरुद्ध अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों और क्रॉस-केस की मौजूदगी को महत्वपूर्ण मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि विवाद की जड़ सिविल प्रकृति की है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सेट-असाइड करते हुए अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत प्रदान की, यह स्पष्ट करते हुए कि मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की जा रही है।
केस विवरण:
Bunty Yadav v. State of Bihar, Criminal Appeal No. 493 of 2026, निर्णय दिनांक 27-01-2026
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