सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छह हाई कोर्ट के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश की

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Supreme Court Collegium recommends appointment of judges for six High Courts

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के छह उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति से संबंधित अहम निर्णय लेते हुए विभिन्न अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की है। कॉलेजियम की यह बैठक 29 जुलाई 2025 (सोमवार) को हुई थी, जिसकी संस्तुतियाँ देर रात सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक की गईं।

कॉलेजियम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के सेवानिवृत्त होने के बाद नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश CJI बीआर गवई कर रहे हैं। बैठक में उनके साथ न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ भी शामिल थे।


🔹 दिल्ली हाई कोर्ट

  • विमल कुमार यादव, जो एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं, को दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।

🔹 बॉम्बे हाई कोर्ट

कॉलेजियम ने तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की:

  1. अजीत भगवानराव कडेठणकर
  2. आरती अरुण साठे
  3. सुशील मनोहर घोडेस्वर

🔹 कर्नाटक हाई कोर्ट

  • वर्तमान में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस गुरुसिद्दैयाह बसवराजा को स्थायी न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है।

🔹 कोलकाता हाई कोर्ट

स्थायी नियुक्तियाँ:

  • जस्टिस पार्थ सारथी सेन
  • जस्टिस अपूर्वा सिन्हा राय

अतिरिक्त कार्यकाल विस्तार (1 वर्ष):

  • जस्टिस प्रसेंजित बिस्वास
  • जस्टिस उदय कुमार
  • जस्टिस अजय कुमार गुप्ता
  • जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य
  • जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी
  • जस्टिस मोहम्मद शब्बार राशिदी
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🔹 छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

  • जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल (अतिरिक्त न्यायाधीश) को स्थायी न्यायाधीश बनाए जाने की अनुशंसा।

🔹 आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट

चार अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी बनाने की सिफारिश:

  1. जस्टिस हरिनाथ नुनेपल्ली
  2. जस्टिस किरणमयी मंदावा
  3. जस्टिस सुमति जगदम
  4. जस्टिस न्यापति विजय

📌 प्रासंगिक टिप्पणी:

यह सिफारिशें न्यायपालिका की निरंतरता और उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निपटान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि कई उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की रिक्तियाँ वर्षों से लंबित थीं, जिनकी भरपाई अब प्राथमिकता पर की जा रही है।

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