‘SIR 2.0 पर SC की स्पष्ट चेतावनी: लोकतंत्र की जड़ में मतदाता सूची—बाधा बर्दाश्त नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने SIR 2.0 के दौरान बीएलओ और अन्य कर्मचारियों को मिल रही धमकियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए चेताया कि हालात नहीं संभले तो अराजकता फैल सकती है। पश्चिम बंगाल में SIR निगरानी के लिए चुनाव आयोग ने 5 IAS अधिकारियों को SRO नियुक्त किया।

  • SIR 2.0 पर SC की सख्ती: बीएलओ को धमकियों से देश में ‘अराजकता’ का खतरा
  • ‘SIR 2.0 पर SC की स्पष्ट चेतावनी: लोकतंत्र की जड़ में मतदाता सूची—बाधा बर्दाश्त नहीं
  • SIR 2.0 में बीएलओ को धमकियों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, कहा—स्थिति नहीं संभली तो फैल सकती है अराजकता

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2.0 के तहत मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण कार्य में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और अन्य कर्मचारियों को पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में मिल रही धमकियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि इन हालातों को तत्काल नियंत्रित नहीं किया गया तो स्थिति “अराजकता” की ओर बढ़ सकती है—जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता के लिए खतरा है।

यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई, जिसमें अदालत ने निर्वाचन आयोग (ECI) से विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा SIR प्रक्रिया में मिल रहे सीमित सहयोग पर भी कठोर रुख दिखाया। अदालत ने कहा कि राज्य का असहयोग न केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करता है, बल्कि चुनावी अधिकारियों की सुरक्षा को भी संकट में डाल देता है।


SC ने चेताया—“अगर हालात बिगड़ते हैं तो पुलिस तैनात करनी पड़ेगी”

सुनवाई के दौरान CJI नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि SIR प्रक्रिया में बाधा डालने और बीएलओ सहित अन्य फील्ड स्टाफ को डराने-धमकाने की घटनाएँ बेहद गंभीर हैं। अदालत ने टिप्पणी की:

“अगर स्थितियाँ और बिगड़ती हैं, तो पुलिस तैनात किए बिना कोई रास्ता नहीं बचेगा। यदि समय रहते इन घटनाओं को रोका नहीं गया, तो देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।”

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि उसके पास पर्याप्त संवैधानिक अधिकार हैं और वह इन धमकी भरी घटनाओं से निपटने में सक्षम है। कोर्ट ने आयोग की प्रतिक्रिया को संज्ञान में लेते हुए कहा कि:

“यदि आपके पास सभी अधिकार हैं, तो ज़मीन पर कार्रवाई भी दिखनी चाहिए। अन्यथा स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।”


ECI ने SIR प्रक्रिया की निगरानी के लिए पश्चिम बंगाल में नियुक्त किए 5 IAS अधिकारी

SC की चिंता के बीच चुनाव आयोग ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए पाँच वरिष्ठ IAS अधिकारियों को स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (SROs) नियुक्त किया।

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नियुक्त अधिकारी और उनकी जिम्मेदारियाँ:

  • कुमार रवि कांत सिंह (संयुक्त सचिव, रक्षा मंत्रालय) – प्रेसिडेंसी संभाग
  • नीरज कुमार बांसोद (गृह मंत्रालय) – मेदिनीपुर संभाग
  • कृष्ण कुमार निराला (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) – बर्दवान संभाग
  • दो अन्य वरिष्ठ अधिकारी – राज्य के शेष संभागों में निगरानी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) दफ्तर के एक अधिकारी ने कहा कि SRO की नियुक्ति से सभी संभागों में SIR प्रक्रिया की जांच और निगरानी और मजबूत होगी तथा फील्ड स्तर पर किसी भी दबाव या बाधा को तुरंत चिन्हित किया जा सकेगा।


SIR 2.0: 4 नवंबर से शुरू, अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को

पश्चिम बंगाल में SIR 2.0 का कार्य 4 नवंबर 2025 से चल रहा है।
निर्वाचन आयोग 14 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी करेगा।
SIR के दौरान:

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण
  • मृत/स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना
  • डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान
  • संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सत्यापन

जैसे कार्य किए जा रहे हैं।


SC की स्पष्ट चेतावनी: लोकतंत्र की जड़ में मतदाता सूची—बाधा बर्दाश्त नहीं

अदालत ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची की शुचिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।
बीएलओ कार्य का “ग्राउंड ज़ीरो” होते हैं, और उन्हें धमकाना सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।

SC ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी धमकियों और बाधा की शिकायतें सामने आई हैं। अदालत इस पूरे मामले पर नियमित निगरानी रखेगी।

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