SC refers Safdar Nagori’s sedition conviction appeal to three-judge bench, cites SG Vombatkere order on Section 124A
यह आदेश प्रतिबंधित संगठन सिमी के संस्थापक सफदर नागोरी की याचिका पर पारित किया गया, जिन्होंने आईपीसी की धारा 124ए के तहत अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की है, जो लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) के पूर्व प्रमुख सफदर नागोरी द्वारा दायर उस आपराधिक अपील को तीन-सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 124A (राजद्रोह) के तहत दोषसिद्धि को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंहा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजरिया की पीठ ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के SG Vombatkere बनाम भारत संघ (11 मई 2022) के निर्णय को ध्यान में रखते हुए पारित किया, जिसमें अदालत ने कहा था:
“धारा 124A के तहत आरोपित सभी लंबित ट्रायल, अपील और कार्यवाहियां स्थगित रहेंगी।”
“यदि अदालत यह माने कि अन्य धाराओं के अंतर्गत सुनवाई से अभियुक्त को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा, तो उन धाराओं पर सुनवाई आगे बढ़ सकती है।”
🔍 सफदर नागोरी की ओर से पेश की गई दलीलें:
वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत से आग्रह किया कि:
- चूंकि निचली अदालत पहले ही नागोरी को दोषी ठहरा चुकी है और अपील SG Vombatkere आदेश से पहले दायर की गई थी, ऐसे में हाई कोर्ट को अपील पर सुनवाई की अनुमति दी जाए।
- फरासत ने कहा, “124A के कारण ही न्यायाधीश आदेश देने से हिचक रहे हैं। मैं चाहता हूँ कि मेरी अपील इस धारा पर भी सुनी जाए — बरी हो पाऊँ या नहीं, यह जोखिम मैं उठाना चाहता हूँ।”
- उन्होंने यह भी बताया कि नागोरी 18 वर्षों से जेल में बंद हैं।
🏛️ सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया:
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो कोर्ट में उपस्थित थे, ने कहा:
“न्यायाधीश को इसलिए संकोच हो सकता है क्योंकि यह व्यक्ति SIMI का संस्थापक है।”
⚖️ कोर्ट का आदेश और तर्क:
न्यायालय ने माना कि:
- यह मामला SG Vombatkere आदेश की व्याख्या की माँग करता है, जिसे तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने पारित किया था।
- चूंकि 124A की संवैधानिक वैधता का मामला भी संविधान पीठ को भेजा जा चुका है (12 सितंबर 2023 को), इसलिए यह उचित होगा कि नागोरी की अपील को भी कम से कम तीन जजों की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
न्यायमूर्ति नरसिंहा ने आदेश दिया:
“यह अपील तीन-सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाए।”
📜 पृष्ठभूमि:
- सफदर नागोरी और 10 अन्य अभियुक्तों को 15 मई 2025 को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने IPC की धारा 124A के तहत दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा दी थी।
- लेकिन हाई कोर्ट ने SG Vombatkere के 2022 आदेश के आधार पर अपीलों की सुनवाई स्थगित कर दी थी।
- कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि आरोपी 17 वर्ष जेल में बिता चुके हैं और वे सुप्रीम कोर्ट से आदेश स्पष्ट करने की मांग करेंगे।
🧾 महत्वपूर्ण कानूनी पृष्ठभूमि:
- SG Vombatkere मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 124A IPC (राजद्रोह) की वैधता को संविधान पीठ के समक्ष भेजा था, यह कहते हुए कि केदारनाथ सिंह निर्णय (जिसने इसे वैध ठहराया था) में अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) पर विचार नहीं किया गया था।
- केंद्र सरकार की यह दलील कि संसद द्वारा नया कानून लाए जाने तक सुनवाई टाली जाए, कोर्ट ने अस्वीकार कर दी थी।
⚖️ मामले का शीर्षक:
Safdar Nagori v. State Of Madhya Pradesh (CrA No. 34189/2025)
