सबरीमाला मंदिर से 4.54 किलो सोना गायब होने के मामले में SIT ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य के.पी. शंकरदास को गिरफ्तार किया। जांच 2019 में हुए कथित सोना गबन और बोर्ड के फैसलों पर केंद्रित है।
सबरीमाला गोल्ड चोरी केस: SIT ने पूर्व देवस्वोम बोर्ड सदस्य के.पी. शंकरदास को किया गिरफ्तार
अस्पताल में दर्ज हुई गिरफ्तारी
सबरीमाला गोल्ड चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व सदस्य के.पी. शंकरदास को गिरफ्तार कर लिया है।
केरल पुलिस के अनुसार, शंकरदास पिछले कुछ दिनों से तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे, जहां उनकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज की गई।
इस गिरफ्तारी की सूचना कोल्लम विजिलेंस कोर्ट को दे दी गई है।
देवस्वोम बोर्ड के फैसले जांच के घेरे में
शंकरदास उस समय TDB की प्रशासनिक समिति के सदस्य थे, जब बोर्ड के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार थे, जिन्हें इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
SIT का मानना है कि इसी कार्यकाल के दौरान लिए गए नीतिगत और प्रशासनिक फैसले कथित अनियमितताओं की जड़ में हैं, जिनके चलते सबरीमाला मंदिर के लिए निर्धारित सोना गायब हुआ।
क्या है सबरीमाला गोल्ड चोरी मामला?
यह मामला वर्ष 2019 का है, जब मंदिर के:
- श्रीकोविल (गर्भगृह) के द्वार,
- और द्वारपालक (Dwarapalaka) मूर्तियों
के नवीनीकरण और री-गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर करीब 4.54 किलोग्राम सोने की कथित हेराफेरी की गई।
आरोप है कि पवित्र संरचनाओं से सोना हटाया गया और उसे नियमों के विरुद्ध इस्तेमाल या गबन कर लिया गया।
विजय माल्या की 1998 की दानराशि से जुड़ा विवाद
इस विवाद की जड़ें 1998 तक जाती हैं, जब उद्योगपति विजय माल्या ने:
- 30.3 किलोग्राम सोना, और
- 1,900 किलोग्राम तांबा
सबरीमाला अयप्पा मंदिर में स्वर्णमंडन और क्लैडिंग कार्य के लिए दान किया था।
बाद में हुए निरीक्षणों और केरल हाईकोर्ट की निगरानी में हुई जांचों में यह सामने आया कि दान किए गए सोने और वास्तव में उपयोग किए गए सोने की मात्रा में गंभीर विसंगतियां हैं।
SIT की रिपोर्ट से तेज हुई जांच
SIT ने जब केरल हाईकोर्ट में अपनी दूसरी रिपोर्ट दाखिल की, तब जांच ने रफ्तार पकड़ी।
रिपोर्ट में देवस्वोम बोर्ड की बैठकों के मिनट्स और निर्णयों में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया।
अब तक की प्रमुख गिरफ्तारियां
इस मामले में अब तक:
- उन्नीकृष्णन पोट्टी (मुख्य आरोपी) — अक्टूबर में गिरफ्तार
- विजयकुमार (पूर्व TDB सदस्य)
- कंदरारु राजीवरु (वरिष्ठ तंत्री) — 9 जनवरी को गिरफ्तार
SIT का आरोप है कि तंत्री ने धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करते हुए सोने से मढ़े पवित्र अवयव हटाने के लिए “मौन अनुमति” दी, जो आपराधिक साजिश के दायरे में आता है।
राजनीतिक विवाद भी तेज
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने:
- जांच को किसी निष्पक्ष/तटस्थ एजेंसी को सौंपने की मांग की है,
- और केरल सरकार पर वरिष्ठ मंत्रियों की संलिप्तता को लेकर सवाल उठाए हैं।
कानूनी और संस्थागत महत्व
यह मामला केवल सोने की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि:
- धार्मिक संस्थानों के प्रशासन,
- देवस्वोम बोर्ड की जवाबदेही,
- और आस्था से जुड़े संसाधनों के संरक्षण
जैसे गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाता है।
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