सबरीमाला गोल्ड हेराफेरी केस: तंत्री कंथर राजीवर को जमानत, 7 अप्रैल से एंट्री विवाद पर सुनवाई

कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने सबरीमाला गोल्ड हेराफेरी मामले में तंत्री कंथर राजीवर को जमानत दी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट 7 अप्रैल से सबरीमाला मंदिर प्रवेश विवाद पर 9-न्यायाधीशीय पीठ में सुनवाई करेगा।


केरल में बहुचर्चित सबरीमाला गोल्ड हेराफेरी मामले में अहम घटनाक्रम सामने आया है। Kollam Vigilance Court ने बुधवार को तंत्री Kanthar Rajeevar को जमानत दे दी। जमानत आदेश कट्टिलापल्ली और द्वारपालक प्रतिमा मामलों से संबंधित आवेदनों पर लागू होगा।

राजीवर इस मामले में जमानत पाने वाले छठे आरोपी बन गए हैं। उनसे पहले उन्नीकृष्णन पोट्टी, वासु, मुरारी बाबू और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एस. श्रीकुमार को राहत मिल चुकी है। राजीवर को 9 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले जमानत पाने वाले दूसरे आरोपी हैं। विस्तृत जमानत आदेश शीघ्र जारी होने की संभावना है।

क्या है सबरीमाला गोल्ड हेराफेरी मामला?

मामला Sabarimala मंदिर से जुड़े लगभग 4.54 किलोग्राम सोने की कथित हेराफेरी से संबंधित है। आरोप है कि मंदिर के श्रीकोविल (गर्भगृह) के द्वार फ्रेम और द्वारपालक प्रतिमाओं पर चढ़ाए गए सोने में अनियमितता हुई।

यह कथित हेराफेरी 2019 में मंदिर संरचनाओं के पुनः स्वर्णलेपन (re-gold-plating) और नवीनीकरण के नाम पर हुई बताई गई है।

विवाद की जड़ 1998 की उस बड़ी दानराशि से जुड़ी है, जब उद्योगपति Vijay Mallya ने सबरीमाला मंदिर के लिए 30.3 किलोग्राम सोना और 1,900 किलोग्राम तांबा दान किया था। बाद की निरीक्षण रिपोर्टों और न्यायालय की निगरानी में हुई जांच में दान किए गए सोने और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर सामने आने का दावा किया गया।

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सुप्रीम कोर्ट में 7 अप्रैल से सुनवाई

इसी बीच, Supreme Court of India 7 अप्रैल से सबरीमाला मंदिर प्रवेश विवाद और संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगा। यह मामला नौ-न्यायाधीशीय संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।

सुनवाई 7 से 9 अप्रैल तक पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं और समर्थक पक्षों की दलीलों से शुरू होगी। मूल रिट याचिकाकर्ताओं को 14 से 16 अप्रैल तक सुना जाएगा, जबकि प्रत्युत्तर (rejoinders) 22 अप्रैल को निर्धारित हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को तय समयसीमा में मौखिक बहस पूरी करने का निर्देश दिया है।

2018 का ऐतिहासिक फैसला और पुनर्विचार

मामले की पृष्ठभूमि 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी है, जिसमें संविधान पीठ ने Sabarimala Sree Dharma Sastha Temple में 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पारंपरिक प्रतिबंध को असंवैधानिक करार देते हुए सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।

फरवरी 2020 में, नौ-न्यायाधीशीय पीठ ने व्यापक संवैधानिक प्रश्नों—धार्मिक आस्था, समानता और संवैधानिक नैतिकता—पर विचार के लिए मामला बड़े मंच पर भेजा था। केंद्र सरकार ने 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं का समर्थन किया है, जबकि मूल याचिकाकर्ता उस फैसले को बरकरार रखने की मांग कर रहे हैं।

दो समानांतर कानूनी मोर्चे

एक ओर गोल्ड हेराफेरी मामले में जमानत आदेशों से जांच की दिशा पर नजरें टिकी हैं, तो दूसरी ओर मंदिर प्रवेश विवाद पर संविधान पीठ की सुनवाई धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के संवैधानिक संतुलन को फिर केंद्र में लाएगी।

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आने वाले हफ्तों में दोनों मामलों में न्यायिक कार्यवाही के परिणाम देशव्यापी बहस को नया आयाम दे सकते हैं।


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