अगस्ता वेस्टलैंड केस: क्रिश्चियन मिशेल की जमानत शर्तों में ढील पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले से जुड़े CBI मामले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की जमानत शर्तों में संशोधन की मांग पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा है। कोर्ट 23 दिसंबर को फैसला सुनाएगी।

अगस्ता वेस्टलैंड केस: क्रिश्चियन मिशेल की जमानत शर्तों में ढील पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर सौदे से जुड़े CBI मामले में आरोपी क्रिश्चियन मिशेल जेम्स द्वारा दायर आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया। इस आवेदन के जरिए मिशेल ने अपनी जमानत शर्तों में संशोधन का अनुरोध किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आदेश 23 दिसंबर को सुनाया जाएगा।

यह मामला विशेष न्यायाधीश (CBI) संजय जिंदल के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। अदालत ने आरोपी पक्ष और अभियोजन दोनों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह, अधिवक्ता मनु मिश्रा के सहयोग से पेश हुए, जबकि आरोपी क्रिश्चियन मिशेल की ओर से एडवोकेट अलजो के. जोसेफ ने दलीलें रखीं।

दिसंबर 2018 से न्यायिक हिरासत में है क्रिश्चियन मिशेल

ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को 4 दिसंबर 2018 को दुबई से प्रत्यर्पण (extradition) के बाद CBI ने गिरफ्तार किया था। वह अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़े भ्रष्टाचार और साजिश के आरोपों का सामना कर रहा है।

शनिवार को ही राउज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में मिशेल की रिहाई का आदेश दिया था। इसके बाद CBI केस में जमानत शर्तों को लेकर यह नई अर्जी दाखिल की गई।

आरोपी की दलील: अधिकतम सजा अवधि पूरी हो चुकी

क्रिश्चियन मिशेल की ओर से दलील दी गई कि जिन अपराधों के लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था, उनके लिए अधिकतम सजा 7 वर्ष है, और वह यह अवधि पहले ही हिरासत में पूरी कर चुका है। ऐसे में आगे हिरासत में रखना न्याय और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

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आरोपी पक्ष ने यह भी जोर दिया कि

  • प्रत्यर्पण नियमों के अनुसार, किसी व्यक्ति पर उन अपराधों के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जिनका उल्लेख प्रत्यर्पण अनुरोध में नहीं किया गया हो।
  • IPC की धारा 467 (जालसाजी) का उल्लेख प्रत्यर्पण अनुरोध में नहीं था, फिर भी CBI ने इस धारा के तहत चार्जशीट दाखिल की है।

इसके अलावा, यह भी तर्क दिया गया कि प्रत्यर्पण अनुरोध भेजने की वैधानिक प्राधिकृत संस्था गृह मंत्रालय (MHA) है, जबकि इस मामले में अनुरोध विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा भेजा गया था, और यह तथ्य अभियोजन द्वारा अदालत के समक्ष नहीं रखा गया।

आरोपी पक्ष ने यह भी कहा कि मिशेल लंबे समय से हिरासत में है, अब तक न तो ट्रायल शुरू हुआ है और न ही आरोप तय किए गए हैं, जिससे उसके जीवन और स्वतंत्रता का गंभीर सवाल खड़ा होता है।

CBI का जवाब: सभी मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट तक निर्णय

CBI की ओर से SPP डी.पी. सिंह ने इन दलीलों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि

  • आरोपी द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट तक निर्णय हो चुका है
  • IPC की धारा 467 से जुड़े प्रश्नों पर आरोप तय होने के चरण में विचार किया जा सकता है।

CBI ने यह भी दलील दी कि मिशेल अपनी मर्जी से हिरासत में है, क्योंकि जमानत मिलने के बावजूद उसने अब तक जमानत बांड दाखिल नहीं किया है

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वीज़ा और FRRO से जुड़ा मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच अधिकारी को FRRO (Foreigners Regional Registration Office) को की गई पत्राचार को रिकॉर्ड पर दाखिल करने का निर्देश दिया। आरोपी पक्ष ने आशंका जताई कि यदि मिशेल को रिहा किया जाता है, तो उसे दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है, क्योंकि उसके पास वैध वीज़ा या यात्रा दस्तावेज़ नहीं हैं

3600 करोड़ के वीवीआईपी चॉपर घोटाले का मामला

यह मामला करीब 3600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़ा है। आरोप है कि सप्लायर को ठेका दिलाने के लिए उड़ान ऊंचाई (फ्लाइंग हाइट) की शर्तों में बदलाव किया गया और इसके बदले लगभग 200 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई। CBI ने इस मामले में 2013 में FIR दर्ज की थी।

अब सबकी नजरें 23 दिसंबर पर टिकी हैं, जब राउज एवेन्यू कोर्ट यह तय करेगी कि क्रिश्चियन मिशेल की जमानत शर्तों में संशोधन किया जाएगा या नहीं।

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