पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरदासपुर में 19 वर्षीय रणजीत सिंह के कथित फर्जी एनकाउंटर Fake Encounter मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए पंजाब के डीजीपी को तलब किया। पीड़ित परिवार ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है।
Punjab and Haryana High Court ने गुरदासपुर में 19 वर्षीय युवक रणजीत सिंह की कथित एनकाउंटर में मौत के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए Punjab Police के महानिदेशक (DGP) को तलब किया है। यह घटना 23 फरवरी को हुई बताई जा रही है।
पुलिस का दावा: हिरासत से भागने के बाद हुआ एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार रणजीत सिंह को ASI गुरनाम सिंह और होमगार्ड अशोक कुमार की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस का कहना है कि जब उसे पुलिस वाहन से थाने ले जाया जा रहा था, उसी दौरान वैन पलट गई। इस दौरान वह एक बाइक और रिवॉल्वर लेकर भाग गया। पुलिस के मुताबिक उसे जल्द ही पकड़ लिया गया, लेकिन वह फिर से फरार हो गया, जिसके बाद मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।
परिवार का आरोप: यह ‘फर्जी एनकाउंटर’
रणजीत सिंह के परिवार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस घटना को “फर्जी एनकाउंटर” बताया है और दावा किया है कि पुलिस ने उसकी हत्या की है।
पीड़ित पक्ष के वकीलों ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की हत्या के मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), GPS लोकेशन और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है।
स्वतंत्र जांच की मांग
परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता सोनू गिरी ने कहा कि स्थानीय पुलिस ने मामले से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारी परिवार को नहीं दी। इसी वजह से उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
वहीं अधिवक्ता रवि जोशी ने कहा कि यदि मामले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) का जिक्र आता है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला हो सकता है और इसकी जांच National Investigation Agency (NIA) जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।
अदालत ने साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश दिए
पीड़ित पक्ष के एक अन्य वकील रविदीप बड्याल ने बताया कि अदालत ने पुलिस अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड, GPS लोकेशन और CCTV Footage सुरक्षित रखने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।
हालांकि अदालत ने पोस्टमॉर्टम को Postgraduate Institute of Medical Education and Research (PGI) में कराने की मांग को अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) से जुड़ी वजहों के कारण खारिज कर दिया।
अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर विस्तृत जवाब मांग सकता है।
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