POCSO कोर्ट ने 9 दिन में पूरा किया ट्रायल, दिवाली की रात दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 25 साल की सजा

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दिल्ली की स्पेशल POCSO कोर्ट ने सिर्फ 9 दिनों में ट्रायल पूरा कर दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने वाले आरोपी राजकुमार को 25 साल की सजा सुनाई। अदालत ने कहा— नशे में होना कोई राहत नहीं, अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड आवश्यक।

POCSO कोर्ट ने 9 दिन में पूरा किया ट्रायल, दिवाली की रात दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 25 साल की सजा


दिल्ली की POCSO कोर्ट का रिकॉर्ड फैसला: दिवाली की रात दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म पर आरोपी को 25 साल कैद

दिल्ली के तिहाड़ स्थित तिस हज़ारी कोर्ट की स्पेशल POCSO अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया की तीव्रता और संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए एक भयावह मामले में सिर्फ 9 दिनों में ट्रायल पूरा किया और दोषी को 25 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। मामला दिवाली की रात दो वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म से जुड़ा था।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी राजकुमार को 19 नवंबर को दोषी ठहराया और 20 नवंबर को सजा सुनाई। यह केस 20 अक्टूबर की रात दर्ज हुए FIR पर आधारित था, जब निहाल विहार पुलिस स्टेशन में “गलत काम” की सूचना प्राप्त हुई।


🔹 तेज़ ट्रायल, कठोर सजा

विशेष न्यायाधीश (ASJ बबीता पुनिया) ने आरोपी पर:

  • 25 वर्ष कठोर कारावास
  • ₹5,000 का जुर्माना
  • पीड़िता के लिए ₹1.35 लाख का मुआवजा

लगाया।

मामला बेहद संवेदनशील था—दो वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म—और अदालत ने कहा कि समाज की सुरक्षा के लिए कठोर सज़ा जरूरी है।

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🔹 नशे में होना कोई बहाना नहीं: कोर्ट

सजा सुनाते समय अदालत ने आरोपी की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह नशे में था।

जज ने कहा:

“नशे में होना कोई mitigating factor नहीं है। आरोपी ने स्वयं गांजा/शराब का सेवन किया था। उसे किसी ने मजबूर नहीं किया।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता इतनी है कि नरमी की कोई गुंजाइश नहीं।


🔹 आयु भी राहत का आधार नहीं

ASJ बबीता पुनिया ने कहा:

“आरोपी की उम्र एक neutral factor है। दो वर्षीय पीड़िता की उम्र को देखते हुए यह आरोपी के पक्ष में कोई राहत नहीं बनती।”


🔹 कानून न्यूनतम सज़ा तय करता है, अदालत मनमाफी नरमी नहीं दिखा सकती

कोर्ट ने कहा कि POCSO Act और BNS दोनों ही ऐसे मामलों में न्यूनतम सज़ा अनिवार्य करते हैं, इसलिए अदालत “साफ स्लेट” की तरह सज़ा लिख नहीं सकती।

न्यायालय ने टिप्पणी की:

“इस सज़ा से समाज को सुरक्षा मिलेगी, आरोपी अपने अपराध की गंभीरता समझेगा और पुनर्वास की गुंजाइश भी बनी रहेगी।”


🔹 मामले की जांच: आरोपी घायल अवस्था में मिला

FIR के अनुसार:

  • घटना 20 अक्टूबर 2025 को रात 11:19 बजे हुई
  • पुलिस मौके पर पहुंची
  • आरोपी राजकुमार घायल अवस्था में पड़ा मिला
  • बच्ची को तुरंत मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया

राजकुमार पर सुसंगत सबूतों के आधार पर आरोप सिद्ध हुए।


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