No compromise on pilots’ weekly rest – Delhi HC to INDIGO
No compromise on pilots’ weekly rest : दिल्ली हाईकोर्ट ने संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों के तहत दी गई ढील को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो एयरलाइंस को नोटिस जारी किया। DGCA ने कोर्ट को बताया कि पायलटों के साप्ताहिक विश्राम (Weekly Rest) में किसी भी एयरलाइन को कोई छूट नहीं दी गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन नियामक महानिदेशालय (DGCA) द्वारा संशोधित फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL – Flight Duty Time Limitation) नियमों के तहत दी गई कथित ढील को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो एयरलाइंस (इंटरग्लोब एविएशन) को नोटिस जारी किया।
DGCA का स्पष्ट रुख: साप्ताहिक विश्राम में कोई ढील नहीं
सुनवाई के दौरान DGCA ने कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया कि पायलटों के लिए अनिवार्य साप्ताहिक विश्राम (Weekly Rest) किसी भी एयरलाइन के लिए न तो हटाया गया है और न ही उसमें कोई ढील दी गई है। DGCA की ओर से पेश अधिवक्ता अंजना गोसाईं ने कहा—
“साप्ताहिक विश्राम गैर-परक्राम्य (non-negotiable) है। इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। इस संबंध में किसी भी एयरलाइन को कोई छूट नहीं दी गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर लिया जा सकता है।
DGCA ने स्पष्ट किया कि जो एकमात्र ढील दी गई है, वह नाइट ऑपरेशन्स से संबंधित है, और वह भी केवल 10 फरवरी 2026 तक सीमित अवधि के लिए, ताकि संक्रमणकाल (transition phase) के दौरान परिचालन समायोजन किया जा सके।
याचिका में क्या है आरोप?
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि DGCA ने व्यवहार में संशोधित FDTL नियमों को 10 फरवरी 2026 तक स्थगित (abeyance) कर दिया है, जबकि ऐसा करने का उसके पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। याचिका में कहा गया है कि पायलट थकान और यात्री सुरक्षा से जुड़े इन नियमों को कमजोर करना कानून के खिलाफ है, खासकर दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर हुई उड़ानों की रद्दीकरण और देरी की पृष्ठभूमि में।
हालांकि DGCA और इंडिगो ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि FDTL नियम स्थगित नहीं किए गए हैं और केवल सीमित, समयबद्ध और आवश्यक ढील दी गई है, जिससे मूल सुरक्षा मानकों—जैसे साप्ताहिक विश्राम—पर कोई असर नहीं पड़ता।
याचिकाकर्ता कौन हैं?
यह जनहित याचिका:
- सबरी रॉय लेंका, पूर्व एयरक्राफ्ट इंजीनियर,
- अमन मोंगा, क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट (CRM) ट्रेनर, और
- किरण सिंह, एक सामाजिक कार्यकर्ता
द्वारा दायर की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि FDTL व्यवस्था के तहत दी गई अस्थायी ढील भी यात्री सुरक्षा को खतरे में डालती है और DGCA के पास अधिसूचित सुरक्षा नियमों को टालने या कमजोर करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने एयरलाइनों द्वारा स्वयं को “लो-कॉस्ट कैरियर” कहे जाने की प्रथा को भी चुनौती दी है और तर्क दिया है कि मौजूदा विमानन कानूनों या सिविल एविएशन आवश्यकताओं में इस तरह के किसी वर्गीकरण की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।
Maintainability पर आपत्ति, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज नहीं की
प्रतिवादियों ने याचिका की पोषणीयता (maintainability) पर प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि FDTL नियमों को चुनौती देने वाली एक समान याचिका पायलट संघों द्वारा पहले से ही हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के समक्ष लंबित है।
हालांकि, डिवीजन बेंच ने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सबरी रॉय लेंका की पृष्ठभूमि पर ध्यान देते हुए कहा—
“वह एक एयरक्राफ्ट इंजीनियर के रूप में काम कर चुकी हैं। उनके कार्य सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा से जुड़े हैं। उनका locus इस स्तर पर नकारा नहीं जा सकता।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि समान विषय पर लंबित मामला होने के बावजूद अन्य नागरिकों को सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाने से नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
पहले की एक सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मौखिक रूप से कहा था—
“सुरक्षा से जुड़े नियम, एक बार बनाए जाने के बाद, सामान्यतः लागू किए जाने चाहिए, जब तक कि वे कानूनी रूप से दोषपूर्ण न हों या सक्षम मंच पर सफलतापूर्वक चुनौती न दी जाएं। इन नियमों का सीधा संबंध सुरक्षा उपायों से है। उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
आगे की कार्यवाही
हाईकोर्ट ने:
- केंद्र सरकार, DGCA और इंडिगो से विस्तृत जवाब मांगा है,
- DGCA को अपना विस्तृत पक्ष रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है, और
- मामले को चार सप्ताह बाद दोबारा सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
FDTL नियमों का उद्देश्य
DGCA द्वारा 2025 में अधिसूचित संशोधित FDTL नियमों का उद्देश्य पायलटों के ड्यूटी घंटों को सीमित करना, अनिवार्य विश्राम अवधि बढ़ाना और अत्यधिक नाइट लैंडिंग पर रोक लगाकर विमानन सुरक्षा को मजबूत करना है, ताकि भारतीय विमानन मानक वैश्विक फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिद्धांतों के अनुरूप हो सकें।
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