देश की अदालतों में लंबित मामलों का आंकड़ा 5 करोड़ के करीब, लोकसभा में कानून मंत्रालय का खुलासा

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🧾 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित हैं 4.65 करोड़ से अधिक मामले | सुप्रीम कोर्ट में 86 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग

The number of pending cases in the courts of the country is close to 5 crores, Law Ministry disclosed in Lok Sabha

रिपोर्ट | लीगल ब्यूरो

कानून मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि देश भर की जिला और अधीनस्थ अदालतों में 4.65 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। यह जानकारी एक असितारे प्रश्न के उत्तर में दी गई, जिसमें विभिन्न स्तरों की अदालतों में मामलों की स्थिति पर सवाल पूछा गया था।

मंत्रालय ने राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) के आंकड़ों के आधार पर 21 जुलाई, 2025 तक लंबित मामलों की स्थिति निम्न प्रकार दी:

  • 🏛 सुप्रीम कोर्ट: 86,742 मामले
  • ⚖️ उच्च न्यायालय: 63,30,409 मामले
  • 🏢 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय: 4,65,27,906 मामले

⚠️ न्यायिक व्यवस्था पर दबाव, सुधार की दरकार

लंबित मामलों के ये आंकड़े भारत की न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ और देरी की गंभीरता को दर्शाते हैं।

हालांकि, सरकार द्वारा न्यायिक अवसंरचना में सुधार, डिजिटलीकरण, और नई अदालतों की स्थापना जैसे कदम उठाए गए हैं, फिर भी लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है।


📌 समाधान की दिशा में उठाए गए कदम

  • ई-कोर्ट्स परियोजना के तहत कई न्यायालयों का डिजिटलीकरण
  • ऑनलाइन फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई की सुविधा
  • जजों की नियुक्तियों में तेजी लाने के प्रयास
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और विशेष अदालतों की स्थापना
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🧾 निष्कर्ष

यह आंकड़ा देश की विलंबित न्याय प्रणाली को उजागर करता है, जो “न्याय में देरी, न्याय से इनकार” के सिद्धांत की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संरचनात्मक सुधार, मानव संसाधनों की पूर्ति और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायिक व्यवस्था पर से आम जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।

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