लखीमपुर हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दी दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति

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सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर हिंसा मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा को दिवाली मनाने के लिए 20 अक्टूबर को लखीमपुर जाने की अनुमति दी है। कोर्ट ने सभी जमानत शर्तों का पालन अनिवार्य बताया।

लखीमपुर हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दी दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति


सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को दिवाली पर परिवार से मिलने की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखीमपुर हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं, को 20 अक्टूबर को दिवाली के अवसर पर अपने परिवार से मिलने के लिए लखीमपुर जाने की अनुमति दे दी।

यह अनुमति न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने आशीष मिश्रा के वकील द्वारा की गई अपील पर सुनवाई के दौरान प्रदान की।


उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया—गवाह पर दबाव डालने की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि एक गवाह की शिकायत के आधार पर आशीष मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की है।

गौरतलब है कि 7 अगस्त 2025 को शीर्ष अदालत ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश पुलिस के रुख पर असंतोष जताया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि गवाह बलजिंदर सिंह की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई अपर्याप्त है।

कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि गवाह पुलिस के पास जाने से हिचकिचा रहा है, तो सीनियर पुलिस अधिकारी स्वयं जाकर उसका बयान दर्ज करें और पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत की स्थिति पर शपथपत्र (affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया था।

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गवाह पर दबाव की पुष्टि, FIR की जांच उसी अधिकारी को सौंपी जाएगी

आज की सुनवाई में जब अदालत को यह बताया गया कि गवाह पर दबाव डाले जाने की पुष्टि हो गई है और इस पर FIR दर्ज की गई है, तो पीठ ने कहा कि वही वरिष्ठ अधिकारी जो पहले गवाह की शिकायत की जांच कर रहे थे, अब इस FIR की भी जांच करेंगे।

यह निर्देश इसलिए दिया गया ताकि जांच की निरंतरता बनी रहे और किसी तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की गुंजाइश न रहे।


आठ सप्ताह की अंतरिम जमानत पर हैं आशीष मिश्रा

सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनवरी 2023 को आशीष मिश्रा को आठ सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जिसमें कई सख्त शर्तें लगाई गई थीं।
बाद में यह जमानत अवधि समय-समय पर बढ़ाई जाती रही।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मिश्रा को अपना ठिकाना (location) स्थानीय अदालत को सूचित करना होगा और अगर वे या उनका परिवार गवाहों को प्रभावित करने या मुकदमे में देरी करने की कोशिश करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।


पहले भी दी गई थी सीमित मुलाकात की अनुमति

मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को अपने परिवार से मिलने के लिए हर शनिवार शाम से रविवार दिन तक लखीमपुर खीरी जाने की अनुमति दी थी। उस आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा था कि मिश्रा सिर्फ परिवार के साथ निजी समय बिताएंगे और किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेंगे।


अब दिवाली के लिए मिली विशेष अनुमति

आज अदालत ने अपने पहले के आदेश में संशोधन करते हुए आशीष मिश्रा को 20 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक दिवाली मनाने के लिए लखीमपुर जाने की अनुमति दी।
मिश्रा के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि उनका मुवक्किल 22 अक्टूबर को लखनऊ लौट आएगा।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि मिश्रा को अपनी जमानत की सभी शर्तों का पालन सख्ती से करना होगा, और किसी भी प्रकार का उल्लंघन उनकी रिहाई की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।


निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश लखीमपुर हिंसा मामले की कानूनी प्रक्रिया के बीच आया है, जिसमें आरोप है कि अक्टूबर 2021 में एक प्रदर्शन के दौरान आशीष मिश्रा के वाहन से कई किसानों की मृत्यु हुई थी।

अब जबकि गवाहों पर दबाव डालने की शिकायत की जांच जारी है, कोर्ट द्वारा मिश्रा को दिवाली मनाने की अस्थायी अनुमति देना न्यायिक संतुलन और मानवीय पहलू दोनों को ध्यान में रखकर दिया गया निर्णय माना जा रहा है।

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