Kerala High Court’s big directive: Complete ban on the use of AI tools in judicial orders
केरल हाईकोर्ट ने रविवार को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में क्लाउड-बेस्ड AI टूल्स के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत ने साफ किया कि ChatGPT जैसे टूल्स का उपयोग आदेश या निर्णय पारित करने के लिए नहीं किया जा सकता और ऐसा करने पर कार्रवाई की जाएगी।
📜 प्रमुख निर्देश:
- आदेश या निर्णय देने हेतु AI टूल्स का उपयोग पूर्णतः वर्जित किया गया है।
- AI का निष्कर्ष निकालने के उद्देश्य से उपयोग भी निषिद्ध है।
- केवल प्रशिक्षित और स्वीकृत उपयोगकर्ताओं को AI टूल्स का सीमित व निगरानी-युक्त उपयोग करने की अनुमति होगी।
- AI टूल्स से संभावित त्रुटियों को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
- AI के किसी प्रमाणित टूल में गड़बड़ी पाए जाने पर हाईकोर्ट के IT विभाग को तुरंत सूचित करने के निर्देश हैं।
- न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को AI के उपयोग के लिए केवल न्यायिक अकादमी या हाईकोर्ट द्वारा संचालित प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
यह देश का पहला ऐसा मामला है, जब किसी हाईकोर्ट ने औपचारिक रूप से AI के न्यायिक उपयोग को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं।
🚫 AI और न्यायिक प्रक्रिया: क्यों सावधानी ज़रूरी है?
- AI टूल्स सटीक नहीं होते और भ्रम या गलत व्याख्या का जोखिम होता है।
- न्यायिक आदेशों में AI का उपयोग नैतिक, संवैधानिक और व्यावहारिक दृष्टि से जटिल हो सकता है।
- इस प्रकार के उपकरणों के प्रयोग से न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।
⚖️ ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षा सुधार पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
इसके अतिरिक्त, 16 जुलाई को केरल हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए राज्य परिवहन आयुक्त द्वारा जारी ड्राइविंग लाइसेंस परीक्षा सुधारों को रद्द कर दिया।
🚗 याचिका की मुख्य बातें:
- परिवहन विभाग द्वारा एकतरफा रूप से नियम लागू किए गए।
- 15 साल से पुराने वाहनों के उपयोग पर रोक, फुट गियर वाले दोपहिया वाहनों, ऑटोमेटिक कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर प्रतिबंध जैसे नियम शामिल थे।
- याचिकाकर्ताओं (ड्राइविंग स्कूल्स) ने कहा कि ये केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप है।
👨⚖️ हाईकोर्ट की टिप्पणी:
- नियम “तर्कहीन और असंवैधानिक” हैं।
- परिवहन आयुक्त का सर्कुलर और उससे संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया गया।
- राज्य सरकार इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दे सकती है।
🧾 महत्वपूर्ण बिंदु (Legal Takeaways):
- AI की भूमिका सीमित रहेगी जब तक न्यायपालिका इसके दायरे को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करती।
- राज्य नियमों को केंद्र की विधायी शक्तियों के विरुद्ध लागू नहीं किया जा सकता।
