भारत को मिला नया CJI: जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, जानें उनके कार्यकाल, विरासत और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति से जुड़ी प्रमुख बातें
जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शपथ दिलाई गई इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी सहित कई शीर्ष नेता व विदेशी न्यायिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। यह लेख उनके कार्यकाल, उपलब्धियों और न्यायपालिका पर उनके संभावित प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करता है।
जस्टिस सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश: भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री, कैबिनेट और अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों की उपस्थिति
भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका के नए नेतृत्व की शुरुआत सोमवार को हुई, जब जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर देश-विदेश का अभूतपूर्व न्यायिक, संवैधानिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व देखने को मिला।
🔹 राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
शपथ ग्रहण के दौरान उपस्थित प्रमुख हस्तियों में शामिल रहे—
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- गृह मंत्री अमित शाह
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
- कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल
- पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा व पूर्व CJI
समारोह का एक भावुक क्षण तब देखने को मिला जब जस्टिस सूर्यकांत ने शपथ के तुरंत बाद अपने बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
🔹 अंतरराष्ट्रीय न्यायिक समुदाय की उल्लेखनीय भागीदारी
शपथ ग्रहण समारोह में कई देशों के शीर्ष न्यायाधीश शामिल हुए, जिसने भारत की न्यायिक कूटनीति (judicial diplomacy) को एक नई ऊंचाई दी।
भाग लेने वाले देशों के प्रमुख प्रतिनिधि:
- भूटान: चीफ़ जस्टिस ल्योन्पो नॉर्बू त्शेरिंग
- केन्या: चीफ़ जस्टिस मार्था कोओमे
- मलेशिया: जस्टिस टैन श्री दातून नलिनी पथ्मनाथन
- मॉरीशस: चीफ़ जस्टिस बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल
- नेपाल: चीफ़ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत
- श्रीलंका: चीफ़ जस्टिस पी. पद्मन सूरसेना
इतने बड़े स्तर पर विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति दुर्लभ मानी जाती है।
🔹 जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल और संवैधानिक भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा—
- कार्यकाल शुरू: 18 नवंबर 2025
- रिटायरमेंट: 9 फरवरी 2027 (आयु 65 वर्ष)
उनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की गई, पूर्व CJI बी.आर. गवई की सिफारिश पर।
🔹 सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण योगदान
जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें शामिल हैं—
- अनुच्छेद 370 हटाने से संबंधित फैसला
- पेगासस जासूसी विवाद
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण निर्णय
- नागरिकता अधिकार संबंधी मामलों में न्यायिक व्याख्या
- चुनाव सुधार और इलेक्टोरल रोल की पारदर्शिता पर फैसला
उनके निर्णय न्यायिक विवेक, संवैधानिक संतुलन और सामाजिक न्याय के लिए जाने जाते हैं।
🔹 छोटे शहर से लेकर देश के CJI तक—एक प्रेरणादायक सफर
10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत ने एक सामान्य पृष्ठभूमि से उठकर देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक का लंबा सफर तय किया।
उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ—
- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कई ऐतिहासिक फैसले
- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- सामाजिक न्याय, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों पर विशेष फोकस
उनकी यात्रा भारत की न्यायपालिका में समान अवसर और अथक मेहनत के महत्व को दर्शाती है।
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