इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में FIR दर्ज करना पूरी तरह अवैध है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सक्षम अधिकारी की शिकायत पर ही मजिस्ट्रेट कार्रवाई कर सकते हैं।
चेक बाउंस मामलों में FIR दर्ज करना अवैध: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
Filing FIR in cheque bounce cases is illegal: High Court’s strong comment
चेक बाउंस मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परक्राम्य विलेख अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस) NI Act Sec 138 से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने की पुलिस की कार्रवाई को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल सक्षम अधिकारी की लिखित शिकायत पर ही मजिस्ट्रेट कार्रवाई कर सकते हैं।
जस्टिस विनोद दिवाकर ने यह आदेश बुलंदशहर निवासी सुधीर कुमार गोयल की याचिका पर दिया।
कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- चेक बाउंस मामलों में FIR दर्ज नहीं की जा सकती।
- मजिस्ट्रेट तभी संज्ञान ले सकते हैं जब सक्षम प्राधिकारी की ओर से लिखित शिकायत प्रस्तुत की जाए।
- FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल करना और मजिस्ट्रेट द्वारा उसे बिना परीक्षण के स्वीकार करना आपराधिक न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
- पुलिस द्वारा दर्ज FIR की सूचना मजिस्ट्रेट को 24 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है ताकि झूठे आरोपों की जांच की जा सके।
मामला क्या था?
- शिकायतकर्ता ने सुधीर कुमार गोयल से दो भूखंड बुक कराए।
- भुगतान के बावजूद भूखंड तीसरे पक्ष को बेच दिए गए।
- रिफंड के लिए जारी चारों चेक बाउंस हो गए।
- पुलिस ने इस पर FIR दर्ज कर चार्जशीट दाखिल कर दी।
- कोर्ट ने इसे अवैध बताते हुए मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया और कहा कि नया आदेश कानून के अनुरूप पारित किया जाए।
किन मामलों में FIR नहीं दर्ज होगी?
कोर्ट ने यूपी पुलिस और अभियोजन निदेशालय को निर्देश दिया कि वे ऐसे 38 विशेष अधिनियमों की सूची तैयार करें जिनमें पुलिस FIR दर्ज नहीं कर सकती। इनमें शामिल हैं:
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम
- खान और खनिज अधिनियम
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम
वहीं, NDPS एक्ट, शस्त्र अधिनियम, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पॉक्सो एक्ट जैसे कानूनों में पुलिस को FIR दर्ज करने का अधिकार रहेगा।
📌 केस टाइटल: सुधीर कुमार गोयल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य
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