बिहार SIR में दस्तावेज़ सूची 7 से बढ़ाकर 11: सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘मतदाता-हितैषी’, विपक्ष ने बताया ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’

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Bihar SIR document list increased from 7 to 11: Supreme Court says ‘voter-friendly’, opposition calls it ‘house of cards’

बिहार SIR में दस्तावेज़ सूची 7 से बढ़ाकर 11: सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘मतदाता-हितैषी’, विपक्ष ने बताया ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’

चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नागरिकता साबित करने के लिए स्वीकार्य दस्तावेज़ों की संख्या 7 से बढ़ाकर 11 करने के चुनाव आयोग (ECI) के निर्णय पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा—“सिर्फ एक दस्तावेज़ मांगना मतदाता-विरोधी होगा, लेकिन विकल्प बढ़ाना मतदाताओं के लिए लाभकारी है।” जस्टिस बागची ने कहा, “अब नागरिकता की पहचान के लिए 11 दस्तावेज़ मान्य हैं, पहले यह 7 थे। यह मतदाता को अधिक विकल्प देता है।”

विपक्षी तर्क:
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दस्तावेज़ों की नई सूची को “हाउस ऑफ कार्ड्स” करार देते हुए कहा कि पासपोर्ट, जमीन के कागजात और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेज़ बिहार में बहुत सीमित हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि आधार कार्ड सबसे व्यापक है, लेकिन उसे निर्णायक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा।

याचिकाएँ और पृष्ठभूमि:
यह सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। मामला कई याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें RJD सांसद मनोज झा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), पीयूसीएल, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और पूर्व बिहार विधायक मुजाहिद आलम शामिल हैं।

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याचिकाओं में चुनाव आयोग के 24 जून के निर्देश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत बिहार में बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदाता सूची में बने रहने के लिए नागरिकता का प्रमाण देना अनिवार्य किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आधार और राशन कार्ड जैसे व्यापक रूप से प्रचलित दस्तावेज़ों को सूची से बाहर रखना गरीब और हाशिए पर बसे मतदाताओं—खासतौर से ग्रामीण इलाकों—को सबसे अधिक प्रभावित करेगा।

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