डॉक्टर पत्नी की मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के दंत चिकित्सक को दी जमानत, शुरुआती FIR में दहेज का आरोप नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के दंत चिकित्सक अभिजीत पांडे को पत्नी की संदिग्ध मौत मामले में जमानत दी। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक FIR में दहेज मांग का आरोप नहीं था और आरोपी मार्च 2025 से जेल में है।

नई दिल्ली। एक चर्चित वैवाहिक मृत्यु मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी 2026 को भोपाल के दंत चिकित्सक अभिजीत पांडे को जमानत दे दी। उन पर शादी के चार महीने बाद अपनी डॉक्टर पत्नी की मृत्यु के मामले में आरोप हैं। अदालत ने गौर किया कि प्रारंभिक एफआईआर में दहेज मांग का आरोप नहीं था और आरोपी मार्च 2025 से जेल में बंद है।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 6 अक्टूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज की गई थी।

मामला क्या है?

एफआईआर थाना शाहपुरा, जिला भोपाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दर्ज हुई थी। बाद में आरोपपत्र में BNS की धाराएं 108 और 80 के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धाराएं 3 और 4 जोड़ी गईं। विशेष न्यायाधीश ने BNS की धारा 108 और 80(2) तथा वैकल्पिक रूप से धारा 103 और 85 के तहत आरोप तय किए।

अभिजीत पांडे, जो एमपी नगर भोपाल में क्लिनिक चलाते थे, का मृतका डॉ. ऋचा पांडे से परिचय वहीं हुआ था। डेढ़ वर्ष के संबंध के बाद 4 दिसंबर 2024 को दोनों ने विवाह किया। 21 मार्च 2025 को पत्नी की मृत्यु हुई, जिसे प्रारंभ में आत्महत्या बताया गया।

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बचाव पक्ष की दलील

आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि यह आत्महत्या का मामला है और मृतका अपने पति के एक महिला कर्मचारी से कथित संबंध को लेकर संदेह में थीं।
उन्होंने कहा:

  • आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
  • हत्या या दहेज मृत्यु का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं है।
  • एफआईआर और शुरुआती केस डायरी बयानों में दहेज मांग का आरोप नहीं था; यह बाद के बयानों में जोड़ा गया।
  • आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आरोपी कोई आदतन अपराधी नहीं है।

अभियोजन का पक्ष

राज्य और शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि यह हत्या का मामला है और मृतका को Atracurium Besylate Injection देकर मारा गया। पोस्टमॉर्टम में पांच चोटों का उल्लेख किया गया, जिनसे शारीरिक हमले की आशंका जताई गई।

परिवारजनों—माता, पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों—ने आरोप लगाया कि आरोपी दहेज की मांग करता था।

डिजिटल साक्ष्य और पोस्टमॉर्टम पर कोर्ट की टिप्पणी

रिकॉर्ड के अनुसार, मृत्यु से पूर्व रात मृतका ने अपने मोबाइल का पिन नंबर भेजा था। फोन से एक हस्तलिखित कथित सुसाइड नोट की तस्वीर, व्हाट्सऐप चैट्स, स्क्रीनशॉट्स और झगड़े की ऑडियो रिकॉर्डिंग बरामद हुई। ऑडियो में मृतका कथित तौर पर कहती सुनाई देती हैं:
“आप सिर्फ माही को महत्व देते हैं… आप देखना, कल सुबह मेरा मरा हुआ चेहरा देखेंगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि:

  • एक चोट मृत्यु से 4–5 दिन पूर्व की थी।
  • तीन चोटें संभवतः इंजेक्शन/सुई से हुईं।
  • एक चोट के कारण और समय का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

पीठ ने यह भी नोट किया कि मृतका स्वयं एनेस्थेटिस्ट थीं और प्रथम दृष्टया मृत्यु एनेस्थीसिया में प्रयुक्त दवा से हुई बताई गई है।

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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

पीठ ने कहा कि:

  • प्रारंभिक एफआईआर आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित थी।
  • दहेज मांग का आरोप बाद में जोड़ा गया।
  • आरोपी मार्च 25, 2025 से जेल में है।
  • उसके फरार होने की संभावना नहीं है।

इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने अपील स्वीकार कर जमानत दे दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके अवलोकन मुख्य मुकदमे को प्रभावित नहीं करेंगे।

मामला शीर्षक: Abhijit Pandey v. State of Madhya Pradesh & Anr.


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