आयु छूट लेकर सामान्य वर्ग का दावा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा—आयु में छूट लेकर भर्ती परीक्षा देने वाले पूर्व सैनिक बाद में अनारक्षित (General) श्रेणी में समायोजन नहीं मांग सकते। AAI भर्ती मामले में याचिका खारिज।


Delhi High Court ने स्पष्ट किया है कि आयु में दी गई छूट का लाभ लेकर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen) बाद में स्वयं को अनारक्षित (Unreserved) श्रेणी में समायोजित करने का दावा नहीं कर सकते—भले ही उनके अंक सामान्य वर्ग के कुछ चयनित अभ्यर्थियों से अधिक क्यों न हों।

न्यायमूर्ति Sanjeev Narula ने कई पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते हुए कहा कि “रियायत के आधार पर प्राप्त पात्रता, विचार के एक पृथक स्तर का निर्माण करती है।” अदालत ने दोहराया कि जो अभ्यर्थी किसी विशेष श्रेणी की छूट लेकर पात्रता बाधा पार करता है, वह समानांतर रूप से अनारक्षित अभ्यर्थी के रूप में विचार का दावा नहीं कर सकता।

AAI भर्ती विवाद क्या था?

मामला Airports Authority of India (AAI) द्वारा उत्तरी क्षेत्र में नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों के लिए आयोजित भर्ती से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं को दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के लिए बुलाए गए अभ्यर्थियों की सूची से बाहर कर दिया गया था।

उनका तर्क था कि उनके अंक अनारक्षित श्रेणी के अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक थे, इसलिए उन्हें “माइग्रेशन” के सिद्धांत के तहत सामान्य श्रेणी में समायोजित किया जाना चाहिए।

आयु सीमा पार, केवल छूट से मिली पात्रता

अदालत ने रिकॉर्ड का परीक्षण कर पाया कि याचिकाकर्ता अनारक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से अधिक थे। वे केवल इसलिए परीक्षा में बैठ सके क्योंकि उन्होंने पूर्व सैनिकों को दी गई आयु छूट का लाभ उठाया था।

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कोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी आयु छूट का उपयोग कर पात्रता प्राप्त करता है, तो वह अनारक्षित रिक्तियों पर तभी विचार का दावा कर सकता है जब वह सभी पात्रता शर्तें—विशेषकर आयु—बिना किसी छूट के पूरी करता हो।

क्षैतिज आरक्षण और माइग्रेशन का सिद्धांत

निर्णय में स्पष्ट किया गया कि पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण “क्षैतिज आरक्षण” (Horizontal Reservation) है, जो विभिन्न श्रेणियों में लागू होता है। लेकिन अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का सिद्धांत संबंधित नियमों और कार्यपालिका निर्देशों द्वारा नियंत्रित होता है।

अदालत ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व सैनिक को अनारक्षित पद पर तभी विचार किया जा सकता है जब उसने किसी प्रकार की रियायत न ली हो। यदि आयु छूट ली गई है, तो विचार केवल पूर्व सैनिक कोटे तक सीमित रहेगा।

मेरिट बनाम नियमों का ढांचा

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि मेरिट सर्वोपरि है और अधिक अंक होने के कारण उन्हें सामान्य श्रेणी में स्थान मिलना चाहिए।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि “खुली प्रतियोगिता” (Open Competition) का सिद्धांत भर्ती नियमों के ढांचे के अधीन है। यदि कार्यपालिका के निर्देश आयु छूट को माइग्रेशन में बाधा मानते हैं, तो न्यायालय नीति को तब तक पुनर्लेखित नहीं कर सकता जब तक वह मनमानी या अवैध सिद्ध न हो।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया श्रेणी-वार निर्धारित अनुपात के आधार पर की गई थी। चूंकि याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत प्रोसेस किए गए और उस श्रेणी की मेरिट सीमा में नहीं आए, इसलिए उन्हें बाहर करना मनमाना नहीं कहा जा सकता।

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अंतिम निष्कर्ष

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचिकाकर्ताओं की परीक्षा में भागीदारी ही आयु छूट पर निर्भर थी। ऐसे में वे अनारक्षित श्रेणी में विचार का अधिकार नहीं जता सकते।

इसी आधार पर रिट याचिका खारिज कर दी गई।

यह फैसला स्पष्ट करता है कि भर्ती प्रक्रियाओं में दी गई रियायतें “दोहरा लाभ” पाने का आधार नहीं बन सकतीं और माइग्रेशन का अधिकार तभी उपलब्ध है जब सभी पात्रता शर्तें बिना किसी छूट के पूरी हों।


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