सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत पहली बार मोबाइल फोन लेकर कोर्ट पहुंचे, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के संदेश पढ़े; अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी।
कोर्ट में पहली बार मोबाइल लाए CJI
सूर्यकांत ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक असामान्य स्थिति का सामना किया, जब उन्हें अदालत में अपना मोबाइल फोन लेकर आना पड़ा।
मुख्य न्यायाधीश ने खुद कहा कि अपने पूरे न्यायिक जीवन में यह पहली बार है जब वे मोबाइल फोन लेकर कोर्ट रूम में आए हैं।
सुनवाई के दौरान पढ़े गए मैसेज
सुनवाई के दौरान CJI ने बताया कि उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजे गए कुछ संदेशों को पढ़ना था, जो एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े थे।
अपने मोबाइल से संदेश पढ़ते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें अभी एहसास हुआ कि वे पहली बार कोर्ट में फोन लेकर आए हैं। इस पर कोर्ट रूम में मौजूद वकीलों के बीच हल्की मुस्कान देखी गई।
मालदा घटना और NIA जांच का संदर्भ
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था।
अदालत ने पहले ही National Investigation Agency (NIA) को इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया था।
राज्य प्रशासन को कड़ी फटकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने नाराजगी जताई कि जब कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने संपर्क करने की कोशिश की, तब अधिकारियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
CJI ने सख्त लहजे में कहा कि क्या अधिकारी इतने व्यस्त हैं कि वे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन भी नहीं उठा सकते।
अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल
मुख्य सचिव ने सफाई दी कि उन्हें कोई कॉल नहीं मिला और वे उस समय दिल्ली यात्रा पर थे।
हालांकि, CJI सूर्यकांत इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस की विफलता के कारण ही न्यायिक अधिकारियों को ऐसे संवेदनशील कार्य करने पड़ रहे हैं।
‘लाड़-प्यार’ पर कोर्ट की टिप्पणी
CJI ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों को जिस तरह से “लाड़-प्यार” दिया जा रहा है, वह चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की नौकरशाही की साख को नुकसान हो रहा है और अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
माफी मांगने का निर्देश
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगें और अपने आचरण की भरपाई करें।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस तरह की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
निष्कर्ष: जवाबदेही और संवेदनशीलता का संदेश
यह घटना जहां एक ओर अदालत की कार्यवाही के दौरान एक असामान्य क्षण को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक जवाबदेही पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को भी उजागर करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायिक संस्थाओं के साथ समन्वय और संवेदनशीलता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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