मुंबई के चांदिवली विधानसभा क्षेत्र में EVM-VVPAT की जांच 16 अप्रैल से शुरू होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट की अनुमति के बाद 20 मशीनों की डायग्नोस्टिक जांच होगी—चुनाव पारदर्शिता पर बड़ा कदम।
📌 पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट की अनुमति के बाद EVM जांच
मुंबई के 168-चांदिवली विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल हुई EVM और VVPAT मशीनों की डायग्नोस्टिक जांच 16 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है।
यह प्रक्रिया Bombay High Court की अनुमति के बाद संभव हो पाई, जिसने फरवरी 2026 में 20 मशीनों की जांच को मंजूरी दी थी।
जांच की मांग कांग्रेस उम्मीदवार Naseem Khan द्वारा की गई थी।
⚖️ कानूनी प्रक्रिया: आवेदन से अनुमति तक
नसीम खान ने नवंबर 2024 में ही EVM जांच के लिए आवेदन किया था और निर्धारित शुल्क भी जमा किया था।
हालांकि, प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए न्यायिक अनुमति आवश्यक थी, जिसके चलते मामला लंबित रहा। अंततः हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब जांच शुरू हो रही है।
🗳️ जांच का दायरा: 20 मशीनों की होगी डायग्नोस्टिक चेकिंग
आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार:
- 20 EVM और VVPAT मशीनों का चयन किया गया है
- जांच “डायग्नोस्टिक चेक” तक सीमित होगी
- माइक्रोकंट्रोलर/मेमोरी (burnt memory) की तकनीकी जांच की जाएगी
यह प्रक्रिया मुंबई के बोरीवली (पूर्व) में 16 अप्रैल सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी।
🏢 तकनीकी सहयोग: BEL करेगा परीक्षण
जांच का जिम्मा Bharat Electronics Limited (BEL), बेंगलुरु को सौंपा गया है।
BEL ने 3 अप्रैल को सूचित किया कि:
- जांच दो दिनों तक चलेगी
- विशेषज्ञ टीम मशीनों की तकनीकी जांच करेगी
👥 उपस्थिति: उम्मीदवारों को रहने का निर्देश
नोटिफिकेशन, जिसे उप-जिला निर्वाचन अधिकारी Archana Kadam ने जारी किया, में कहा गया है कि:
- नसीम खान
- उनके प्रतिनिधि
- अन्य उम्मीदवार
जांच प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहें।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया
यह पूरी प्रक्रिया Supreme Court of India के निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें उम्मीदवारों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में इस्तेमाल हुई 5% EVM मशीनों की जांच का अधिकार दिया गया है।
इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाना है।
❗ ‘पहली बार’ के दावे पर स्पष्टीकरण
कुछ रिपोर्ट्स में इसे महाराष्ट्र में पहली EVM जांच बताया गया, जिसे राज्य के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने खारिज किया।
अधिकारियों के अनुसार:
- 2024–2025 के दिशा-निर्देशों के तहत
- फरवरी से अगस्त 2025 के बीच
- 17 उम्मीदवारों के लिए ऐसी जांच पहले ही हो चुकी है
चांदिवली का मामला केवल हाईकोर्ट की अनुमति के कारण लंबित था।
📊 चुनावी पारदर्शिता पर असर
यह जांच कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
- EVM की विश्वसनीयता पर उठते सवालों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी
- उम्मीदवारों को तकनीकी सत्यापन का अवसर मिलेगा
- चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होगा
📌 निष्कर्ष: तकनीकी जांच से बढ़ेगा विश्वास
चांदिवली EVM जांच यह दिखाती है कि चुनावी विवादों को सुलझाने के लिए अब कानूनी और तकनीकी दोनों रास्तों का सहारा लिया जा रहा है।
यह कदम न केवल एक उम्मीदवार की मांग का जवाब है, बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम में भरोसा कायम करने की दिशा में भी अहम पहल है।
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